दीवानगंज के पुराने गुरुद्वारा मंदिर पर रोज उमड़ रही बच्चों-बुजुर्गों की भीड़
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सावन का महीना आते ही जहां गांव-शहरों में धार्मिक आयोजनों की धूम रहती है, वहीं दीवानगंज में वर्षों पुरानी सावन के झूले की परंपरा एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सांची विकासखंड के ग्राम दीवानगंज स्थित पुराने गुरुद्वारा मंदिर परिसर में पेड़ पर सावन का झूला डाला गया है, जहां रोजाना सुबह से शाम तक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग झूले का आनंद लेते नजर आ रहे हैं।
सावन के झूले पर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम के समय यहां ग्रामीणों की चहल-पहल बढ़ जाती है। बच्चे झूला झूलने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते हैं, वहीं बुजुर्ग , माता बहने और महिलाएं भी इस पारंपरिक आयोजन को देखकर पुराने दिनों की यादें ताजा कर रहे हैं।
कई गांवों में खत्म हो रही परंपरा, दीवानगंज में आज भी कायम
ग्रामीणों का कहना है कि पहले सावन के महीने में गांव-गांव पेड़ों पर झूले डाले जाते थे और महिलाएं-बच्चियां सावन के गीत गाते हुए झूला झूलती थीं। लेकिन बदलते समय के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे कई गांवों में समाप्त होती जा रही है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अब सावन के पारंपरिक झूले बहुत कम दिखाई देते हैं।
ऐसे में दीवानगंज के पुराने गुरुद्वारा मंदिर पर झूला डाले जाने से न केवल बच्चों को मनोरंजन का अवसर मिल रहा है, बल्कि सावन की पुरानी लोक परंपरा भी जीवित बनी हुई है।

नई पीढ़ी को मिल रहा ग्रामीण संस्कृति से जुड़ने का मौका
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की परंपराएं गांव की संस्कृति और सामाजिक मेल-जोल को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मोबाइल और आधुनिक मनोरंजन के दौर में पेड़ पर डाले गए झूले का आनंद लेना बच्चों के लिए अलग अनुभव है। वहीं बुजुर्गों के लिए यह झूला उनके बचपन और सावन के पुराने दिनों की यादें ताजा कर रहा है।
दीवानगंज में सावन के झूले का यह दृश्य बदलते दौर में भी लोक परंपराओं के जीवित रहने की खूबसूरत मिसाल बन गया है।