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‘‘स्मार्ट सिटी‘‘ माॅडल पर गरजते-बरसते राहुल गांधी-अरुण पटेल

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आलेख
अरुण पटेल

दूषित पानी पीने से इंदौर में हुई मौतों और बीमार लोगों से मुलाकात के बाद लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी माॅडल पर शाब्दिक हमला बोलते हुए कहा कि यह नया माॅडल है जहां पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है। प्रभावितों के साथ अपने खड़े होने की बात कहते हुए राहुल गांधी ने एक-एक लाख रुपया और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पचास-पचास हजार रुपये के चेक सौंपे। राहुल गांधी का दो-टूक शब्दों में कहना था कि किसी न किसी को जवाबदेह ठहराना चाहिए, क्योंकि यह समस्या सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है बल्कि देश व प्रदेश के कई शहरों में भी यही स्थिति है। भाजपा सरकार साफ पानी और हवा जैसी बुनियादी सुविधाएं देने भी विफल रही है। इस त्रासदी के लिए किसी न किसी को तो जवाबदेह ठहराना चाहिए तथा पीड़ितों को मुआवजा मिलना चाहिये। उनका आरोप था कि आज भी लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है और लोग सिर्फ वही मांग कर रहे हैं जो एक सरकार का कार्य है कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना। राहुल गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष के रुप में जनता के मुद्दे उठाना मेरी जिम्मेदारी है, आप इसे राजनीति कहें या जो भी आपको उचित लगेवह कहें।

राहुल गांधी इंदौर आये और करीब साढ़े तीन घंटे तक इंदौर में रहे और इस बीच उन्होंने बाम्बे अस्पताल पहुंचकर छह मरीजों व उनके स्वजनों से मुलाकात की। उसके बाद भागीरथपुरा में मृतका गीता के घर पहुंचे, फोटो पर फूल चढ़ाये तथा जमीन पर बैठकर परिवारजनों से बात की, वे यहां पर लगभग सात मिनट रुके और एक लाख रुपये का चेक दिया। इस बार राहुल गांधी बुलेट प्रूफ कार की जगह विपिन वानखेड़े की सामान्य कार की अगली सीट पर सवार हो गये तथा अस्पताल और भागीरथपुरा इसी गाड़ी से गये। राहुल गांधी के इंदौर प्रवास के दौरान राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी विधायक महेश परमार, फूलसिंह बरैया और सत्यनारायण पटेल आदि उपस्थित थे। एयरपोर्ट पर ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भागीरथपुरा पर बनी कांग्रेस की समिति की रिपोर्ट दी जिसमें कहा गया था कि लापरवाही से सप्लाई किए गए दूषित पानी से ही 24 मौतें हुई हैं।

पंचायत सचिवों की पौ बारह
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने आम बजट के पूर्व ही एक प्रकार से पंचायत सचिवों की झोली में सौगातों की मूसलाधार झड़ी लगा दी। 23 हजार पंचायतों के पंचायत सचिवों को अब 1300 रुपये का विशेष भत्ता दिया जायेगा। सचिव के निधन पर स्वजनों को दी जाने वाली डेढ़ लाख रुपये की अनुग्रह राशि अनुकम्पा नियुक्ति के बाद वापस नहीं ली जायेगी। अब पंचायत सचिवों का कार्यकाल 62 वर्ष की उम्र तक रहेगा। वहीं दूसरी ओर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सचिव के परिवारजनों को आयुष्मान कार्ड देने और पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के कारण लंबित अनुकम्पा नियुक्ति के मामलों का समाधान निकालने के लिए न्यायालय में पक्ष प्रस्तुत करने की बात कही। पंचायत सचिवों की पंचायत में महत्ता रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था में पंचायत सचिव योजनाओं और विकास कार्यों की धुरी हैं और यही सबसे कड़ी इकाई है। चाहे कितना ही बड़ा आईएएस अधिकारी क्यों न हो, प्रधानमंत्री या सरकार के निर्णयों का कियान्वयन पंचायत स्तर पर ही होता है जिसमें पंचायत सचिव की भूमिका अहम् रहती है। हम रामराज्य की कल्पना करें तो पंचायत सचिव पंचायती राज में हनुमानजी की भूमिका में काम करते हैं।

और यह भी
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों आदिवासियों को अपने साथ जोड़ने के अभियान में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता व संगठन दोनों भिड़े हुए हैं और इसी दौरान आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के एक बड़े आदिवासी नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया है कि आदिवासी समाज और संस्कृति खत्म करने की साजिश की जा रही है। उनका कहना था कि हम जंगल, सूर्य, गाय, बैल और फसल की पूजा करते हैं लेकिन आज देश में होने वाली सोलहवीं जनगणना में वह आदिवासी कोड नहीं मिल पा रहा है। कहीं यह हमारी पहचान को खत्म करने की साजिश तो नहीं है या कहीं ऐसा तो नहीं है कि आदिवासी संस्कृति और समाज को खत्म करने की साजिश हो रही है। नेपानगर के चैनपुरा में 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उमंग सिंघार ने इस बात पर जोर दिया कि हम संकल्प लें कि इस लड़ाई को योजनाबद्ध तरीके से लड़ेंगे। उन्होंने जातिगत जनगणना का समर्थन किया और झारखंड के आदिवासियों के संघर्ष का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि प्रदेश में डेढ़ करोड़ समाज के लोगों का ज्ञापन राष्ट्रपति को भेजकर आदिवासी कोड के अधिकार की मांग की जायेगी।

-लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं
-सम्पर्क: 9425010804, 7999673990

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