सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
भोपाल।रंगकर्मी अनिल पवार की स्मृति में आयोजित पाँचवे एकजुट नाट्य समारोह के दूसरे दिन आशीष पाठक द्वारा लिखित और निर्देशित सोलो नाटक “पॉपकॉर्न “ का मंचन किया गया । संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली और म.प्र.संस्कृति संचालनालय के सहयोग से लिटिल बैलेट ट्रूप के रागबंध सभागार में खेला गया । बालेन्द्र सिंह ने इस नाटक में अकेले ही आठ किरदारों को निभाया और नाटक द्वारान दर्शकों को कहीं भी ऐसा नहीं लगा कि यह सोलो परफ़ॉर्मेंस है ।

बालेंद्र सिंह रूपक के माध्यम से एक ऐसे गाँव के लड़के की कहानी को बताते हैं जो सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता है । लेकिन उसका यह सपना अधूरा रह जाता है और वह पॉपकॉर्न बेचने को मजबूर हो जाता है । रूपक काम पर निकलने से पहले स्टेशन पर रहने वाली गूँगी पागल टुकिया को पॉपकॉर्न के दो पैकेट रोज़ देता है और टुकिया भी उसके पॉपकॉर्न को बड़े चाव से खाती है । लेकिन स्टेशन पर फल बेचने वाला उस गूँगी पागल टुकिया को भी नहीं छोड़ता और उसके साथ बलात्कार कर देता है ।

नाटक में बेरोजगारी, बलात्कार, भ्रष्टाचार, अपराध, बाजारवाद और पूंजीवाद को बड़े ही गंभीरता से दिखाया गया है । रूपक टुकिया के बलात्कार से अत्यधिक दुखी होकर कहता है कि अब स्टेशन पर दो पॉपकॉर्न वाले हो गए । अच्छा आदमी बनाने की कोई मशीन नहीं बनाता, अच्छा आदमी बनाने के लिए कोई चिंतन नहीं करता ।
उल्लेखनीय है कि बालेन्द्र सिंह फ़िल्म पीकू, राजी, जादूगर सैयारा आदि फिल्मों मे अपने अभिनय के जलवे बिखेर चुके हैं