सत्संग के माध्यम से आद्य गुरु शंकराचार्य महाराज का किया स्मरण
उदयपुरा रायसेन।रामचरितमानस विद्यापीठ के तत्वाधान में संचालित मानस यात्रा का कार्यक्रम लक्ष्मी नारायण मंदिर शोकलपुर में आयोजित किया गया, श्री गुरु महाराज समाधि स्थल पर पादुका पूजन एवं गुरु चरण वंदना के पश्चात सत्संग सभा आयोजित की गई।

तुलसी मानस प्रतिष्ठान तुलसी मानस भारती पत्रिका के संपादक देवेंद्र रावत से देवेंद्र रावत ने जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया ,कि जीवन में ज्ञान के साथ बैराग्य होना बहुत आवश्यक है, आद्य गुरु ने हमें मनुष्य शरीर की महत्वता, महापुरुषों का संग, एवं सत्संग से आत्म कल्याण करने के सूत्र बताए हैं, जो वर्तमान में आवश्यक है, सत्संग में स्वामी नित्यानंद गिरी महाराज हिमालय वासी, का आद्य गुरु शंकराचार्य जयंती पर भेजा गया संदेश एवं कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर बृजेश दीक्षित द्वारा प्रेषित ऑडियो संदेशों का प्रसारण किया गया, सभा को हरिदास शास्त्री, सुदामा शास्त्री, योगेश पांडे एवं नवोदित व्यास निर्मल दास महाराज ने भी मानस के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास के संस्कार, संस्कृति के सुसंस्कृत उच्च विचारों को प्रतिपादित किया, मानस कवि बी ,पी, कोश्टी ने ‘हमारे शंकराचार्य काव्य रचना, सुनाकर सभी को भाव विभोर कर दिया, कार्यक्रम आयोजक, हल्के भैया कुशवाहा एवं संतोष कुशवाहा ने उपस्थित अतिथियों का तिलक चंदन लगाकर स्वागत किया,

मानस यात्रा संयोजक अधिवक्ता चतुरनारायण रघुवंशी, ने उपस्थित जनों का आभार प्रकट करते हुए, आगामी कार्यक्रम 26 मई को पतई धाम संत आश्रम में आयोजित किए जाने की घोषणा की, मानस ग्रंथ मंगल आरती में हाकम सिंह अधिवक्ता, घनश्याम खजुरिया, महेश धनौलिया, घनश्याम पवैया, लाल सिंह बिडैया, मुन्ना पाठक, दीपचंद पटेल, भगवान सिंह पीरौनिया, देवेंद्र नौरिया, भगवान सिंह पटेल, लखन कुशवाहा सहित दूर अंचलों से पधारे हुए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया,