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भोजपुर शिव मंदिर में शिवरात्रि महा पर्व पर भक्तो की सुबह से भारी भीड़

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दीपक कांकर रायसेन/रामभरोस विश्वकर्मा मंडीदीप

मप्र के रायसेन जिले में स्थित भोजपुर शिव मंदिर में शिवरात्रि महा पर्व के मौके पर भक्तो की सुबह 5 बजे से ही काफी भीड़ देखी जा रही हैं। इस दौरान भोपाल,रायसेन सहित आसपास के हजारो श्रद्धालु भोजपुर शिव मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुँच रहे हैं।

शिवरात्रि ओर सावन के महीने में विशेषकर सोमवार को यहाॅ शिव भक्तो का काफी जमाबडा रहता हैं।10वी सदी में राजा भोज के समय का यह विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग मंदिर हैं । रायसेन जिले के भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर 11 सदी से 13 वीं सदी के मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण है। इस प्रसिद्ध शिव मंदिर में देश दुनिया से भक्त आतें हैं और यहाँ आकर शिव भक्ति में लींन हो जातें । यह एक ऐतिहासिक धरोहर के साथ साथ धार्मिक प्राचीन धरोहर हैं । भारतीय पुरात्तव विभाग द्वारा संरक्षित यह स्थान जल्द ही यूनिस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जाने वाला है। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध मंदिर के आसपास किये हैं। यहा मान्यता हैं कि जो भक्त सच्चे मन से पूजा अर्चना करता हैं। भगवान भोले नाथ उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं।

भोजपुर मन्दिर का इतिहास

10 बी सदी में राजा भोज के समय का विश्व का सवसे बड़ा शिवलिंग मंदिर हैं । रायसेन जिले के भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर 11 सदी से 13 वीं सदी की मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण है। अगर यह मंदिर पूर्णरूप से निर्मित होता तो पुराने भारत का अपनी तरह का एक आश्चर्य होता है। मंदिर का पूरी तरह भराहुआ

नक्काशी दार गुम्बद और पत्थर की संरचनाएं, जटिल नक्काशी से तैयार किये गए प्रवेश द्वार और उनके दोनों तरफ उत्कृष्टता से गढ़ी गई आकृतियाँ देखने वालों का स्वागत करती हैं।मंदिर की बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढाँचे को कभी बनाया ही नहीं गया। मंदिर को गुंबद के स्तर तक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया मिट्टी का रैम्प अभी तक दिखाई पड़ता है, जो हमें इमारत निर्माण कला (चिनाई) में पुरातन बुद्धिमत्ता का स्वाद चखाता है।

 

भोजपुर, बलुआ पत्थर की रिज जो मध्य भारत की विशेषता है, पर स्थित 11 वीं सदी का एक शहर है। यह मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। बेतवा नदी पुनः बनाए गए इस प्राचीन शहर के पास बहती है जो भोजपुर पर्यटन में पुरानी दुनिया के आकर्षण का समावेश करती है। भोजपुर का यह नाम परमार राजवंश के सबसे शानदार शासक राजा ‘भोज’ के नाम पर रखा गया था। उनके शासनकाल के तहत बिना तराशे हुए बड़े पत्थरों की इमारत बनाने की एक प्राचीन शैली द्वारा (विशाल चिनाई) द्वारा निर्मित यह बांध अवश्य देखे जाने वाले स्थानों में से एक है चाहे आप अचानक पहुँचने वाले पर्यटक हों या फिर वास्तुकला के पुजारी। . भोजपुर और उसके आसपास के पर्यटक स्थल भोजेश्वर मंदिर को पूर्व के सोमनाथ के नाम से भी जाना जाता है जो भारत की उन अद्भुत संरचनाओं वाली इमारतों में से एक है, जिसे एक बार जरूर देखा जाना चाहिए। इस प्राचीन शहर के दैत्य जैसे बांधों के अवशेष आपको आश्चर्य में डाल देंगे। ‘अधूरा’ होने

का तथ्य ही इस प्राचीन शहर को अनूठी गुणवत्ता प्रदान करता है, उन चट्टानी खदानों में जाना बहुत ही रोमांचकारी होता है जहाँ आप हाथ से तराशे गए पत्थर के मूर्ति शिल्प को देख सकते हैं जो कभी एक पूरे मंदिर या महल का रूप नहीं ले पाए। हर दूसरे ऐतिहासिक पर्यटन स्थल पर आप प्राचीन शहर के खंडहरों का निरीक्षण कर सकते हैं पर यहाँ वास्तव में वो शहर है जो कभी पूरा ही नहीं किया गया। मंदिर में देश दुनिया से भक्त आतें हैं और यहाँ आकर शिव भक्ति में लींन हो जातें ।हजारो की संख्या में भक्तों का तांता लगा हुआ हैं ।

 

 

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