32 वर्ष पहले रायसेन जिले के खरगोन में पड़े थे संतश्री के चरण
प्रांजलकमल याज्ञवल्क्य बरेली रायसेन
जिनसूर्य,जनसंत,संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज को खोना वाले बाबा श्री आदिनाथ भगवान मंदिर खरगोन में प्राचीन खोना बाबा के दिव्य सानिध्य में विनयांजलि दी ।इस दौरान गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करके गुरुदेव के प्राणीमात्र पर किये गए उपकारों को याद किया।
आरती एवं पूजन कर दी विनयांजलि
इस दौरान विकास जैन, चंद्रेश जैन, नितिन जैन, अनिल जैन, रूपेश जैन, शैलेन्द्र जैन एवं बंटी जैन सहित कई भक्त उपस्थित थे। समाजजनों ने गुरुदेव के जीवन और आचार्य श्री द्वारा किये गए त्यागों को विस्तार से बताया। इस दौरान भोपाल, अशोकनगर, बेगमगंज, बरेली, सुल्तानगंज, बाड़ी, चैनपुर, गुना, बनखेड़ी आदि जगह के भक्त बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।

32 वर्ष पहले खरगोन पधारे थे संतश्री विद्यासागर जी
उल्लेखनीय है कि संतशिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ने सन् 1992 में खरगोन की भूमि को अपनी चरणरज से धन्य किया। बताया गया है कि तब आचार्य जी ने खोना वाले बाबा के दर्शन कर कहा था कि अभी जीर्णोद्धार का समय नहीं आया है।
बाद में जब आचार्य श्री कुलरत्न भूषण जी महाराज ने आचार्य श्री के दर्शन नेमावर में किये तो आचार्य श्री ने खरगोन मार्ग से कुंडलपुर दर्शन का संकेत कुलरत्नभूषण जी को दिया जिसके बाद आचार्य श्री विद्यासागर जी के आशीर्वाद एवं दूरदृष्टि से आचार्य कुलरत्नभूषण जी के सानिध्य में खोना वाले बाबा श्री आदिनाथ भगवान का जीर्णोद्धार हुआ।जो कि आज का महत्वपूर्ण तीर्थ बन चुका है जहाँ दूर दूर से यात्री दर्शानार्थ आते हैं। यह स्थान काफी चमत्कारी माना जाता है।