जामवंत के वचन सुहाए, सुन हनुमान हृदय अति भाए
सी एल गौर रायसेन
श्री रामलीला महोत्सव के चलते शनिवार को रामलीला मैदान में लंका दहन के आकर्षण प्रसंग की लीला का मंचन किया गया लीला को देखकर दर्शन भी मंत्र मुक्त हो गए। प्रस्तुत की गई लीला के अनुसार भगवान राम की सेना जामवंत सहित लंका में जाने के लिए विचार विमर्श करते हैं, इस दौरान जामवंत ने श्री हनुमान जी से कहा कि आप ही हैं जो कि इस लंका को पार कर सकते हैं आप जाइए और माता सीता का पता लगाइए। इस प्रकार से जामवंत के वचन सुनकर हनुमान जी लंका में प्रवेश करने के लिए चल देते हैं रास्ते में सुरसा नमक राक्षसी उनका रास्ता रोकती हैं और अपना स्वरूप बड़ा लेती है इधर सुरशा को देखकर हनुमान जी भी अपना बड़ा स्वरूप कर लेते हैं फिर छोटा रूप धारण करते हुए सुरसर के मुख में से जाकर और कान से निकलते हैं और परमात्मा राम जी की कृपा से लंका के द्वार पर पहुंच जाते है जहां हनुमान जी देखते हैं कि रावण की लंका के द्वार पर बड़े-बड़े राक्षस पहरेदार खड़े हुए हैं परंतु वह नींद में होते हैं इसी दौरान हनुमान जी लंका के भीतर प्रवेश कर जाते हैं । वहां जाकर देखते हैं कि यहां तो सोने की लंका है और इस लंका नगरी में एक घर ऐसा दिखाई देता है जहां राम-राम लिखा है और तुलसी का पौधा भी आंगन में दिखाई देता

है तो हनुमान जी ने सोचा यह तो मेरे राम का कोई भक्त है इस दौरान वहां लंका पति रावण के भाई विभीषण से हनुमान जी की भेंट होती है हनुमान जी माता सीता का पता विभीषण जी से पूछते हैं तो वह बताते हैं कि लंका नगरी में अशोक वाटिका है वहां पर माता-पिता बैठी हुई है परंतु आप सावधानी से जाना। इस प्रकार से विभीषण के वचन सुनकर हनुमान जी अशोक वाटिका की ओर चल देते हैं वहां जाकर देखते हैं की माता सीता राम राम की रट लगाए हुए हैं और लंका पति रावण बार-बार आकर माता सीता को धमका रहा है इस प्रकार से हनुमान जी वृक्ष के ऊपर चढ़ जाते हैं और वहां से सारी बातें सुनते हैं जब सीता को धमका कर रावण चला जाता है तो वहां हनुमान जी वृक्ष से नीचे उतरकर माता सीता के सामने पहुंचते हैं और प्रणाम करते हैं परंतु सीता पहचान नहीं पाती हैं कहते हैं कि तुम कौन हो कहां से आए हो कैसे इस लंका नगरी में प्रवेश कर लिया बताओ इस पर हनुमान जी अपना परिचय देते हुए कहते हैं कि मैं भगवान राम का दूत हनुमान हूं और उन्होंने आपका पता लगाने के लिए मुझे लंका में भेजा है मैं अब आपको पाकर धन्य हो गया हूं मां कहिए आप कैसी हैं मैं जाकर पूरा हाल प्रभु राम जी को बताऊंगा। इस दौरान हनुमान जी पहचान के रूप में सोने की अंगूठी देते हैं जिस पर राम लिखा होता है तो माता सीता को पूरा विश्वास हो जाता है कि यह तो मेरे स्वामी राम के भक्त हनुमान है। इस प्रकार से यहां सीता और हनुमान जी के बीच प्रसंग होता है हनुमान जी भूख लगने का कारण बताते हैं और सीता माता से आज्ञा लेकर अशोक वाटिका में प्रवेश करते हुए फल खाते हैं और सारी अशोक वाटिका को उजाड़ कर फेंक देते हैं । इस खबर को सुनकर वहां लंका पति रावण का पुत्र अक्षय कुमार आता है तो उसे भी हनुमान जी युद्ध के दौरान मार देते हैं। जब अक्षय कुमार के मरने की खबर रावण को मिलती है तो वह गुस्से में आग बबूला होता है और उनके पुत्र इंद्रजीत मेघनाथ के लिए हनुमान को पकड़ कर लाने के लिए कहता है । इधर मेघनाथ अपने पिता रावण से आज्ञा लेकर चल देते हैं वहां वह हनुमान जी से युद्ध करते हैं ब्रह्म शक्ति प्राप्त होने के कारण हनुमान जी को बांधकर और लंका पति रावण के दरबार में ले आते हैं जहां लंका पति रावण और हनुमान के बीच आकर्षक प्रसंग का मंचन होता है इस दौरान लंका पति रावण अपने सेना पतियों को आदेश देते हुए हनुमान की पूंछ में आग लगाने के लिए कहता है । इस तरह से जैसे ही हनुमान जी की पूंछ में आग लगती है तो वह इधर-उधर घूम कर लंका पति रावण की सोने की लंका जलाकर पल भर में नष्ट कर देते हैं । इस प्रकार से रामलीला में लंका दहन प्रसंग का आकर्षक मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। रामलीला में हनुमान जी की भूमिका अनिल पाराशर ने और मेघनाथ की भूमिका आदित्य शुक्ला द्वारा निभाई गई, रावण की भूमिका दौलत भाई और अक्षय कुमार की भूमिका गुरु दयाल बैरागी द्वारा निभाई गई।

रामलीला में रविवार को होगी सेतु बांध रामेश्वरम प्रसंग की आकर्षक प्रस्तुति
श्री रामलीला मेला समिति के मीडिया प्रभारी सी एल गौर ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को सेतु बांध रामेश्वरम स्थापना प्रसंग की अति सुंदर लीला का मैदानी मंचन कलाकारों द्वारा किया जाएगा। मेला समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी ने सभी धर्म प्रेमियों से रामलीला देखने एवं धर्म का लाभ उठा जाने की अपील की है।