आंगनवाड़ी का संचालन केवल कागजों में
नहीं मिल रहा पोषाहार,गर्भवती महिलाएं भी परेशान
कलेक्टर ने रवाना किया दल,बालक एनआरसी में भेजा
शिवपुरी। कुपोषण और अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत के लिए कुख्यात शिवपुरी में आदिवासियों के लिए फिर से हालत विकट होने लगे हैं । बम्हारी पंचायत के गाँव कोट्का में लगभग 1 दर्जन बच्चे कुपोषण जैसी भयावह स्थिति से जूझ रहे हैं । शिवपुरी जनपद के ग्राम पंचायत बम्हारी अंतर्गत आने वाले ग्राम कोटका में सहरिया जनजाति के लोग बड़ी ही विषम परिस्थितियों में अपनी सांसे सलामत रखे हुए हैं । प्रशासन की अनदेखी का शिकार इस गांव में कब मौत अपना तांडव दिखा दे कुछ कहा नहीं जा सकता। सहरिया जनजाति को कुपोषण से मुक्त करने के जितने भी दावे और प्रयास हैं वह इस गांव में विफल नजर आते हैं। आदिवासी बाहुल्य इस गाँव में आंगनवाड़ी भवन तक नहीं है जिससे सहरिया आदिवासी बच्चों को पोषित करने चलाई जा रही तमाम सरकारी योजनाएं ढाक के तीन पात साबित हो रही हैं । सहरिया क्रांति सामाजिक आंदोलन के दल ने आज बम्हारी पंचायत के कोट्का गांव का भ्रमण किया तो भयावह हालात सामने आए । इस गांव में दर्जनभर बच्चे कुपोषण थी स्थिति से संघर्ष कर रहे हैं अपने बच्चों का जीवन बचाने के लिए उनके गलों में माताओं ने ताबीज बांध रखे हैं। मामला सोशल मीडिया पर आते ही आनन फानन में सरकारी अफसरों के दल कोटका गाँव पहुंचे जहां से कुपोषित बच्चे अधिराज आदिवासी को एनआरसी शिवपुरी में दाखिल करने रवाना किया है ।

शिवपुरी जनपद की ग्राम पंचायत बम्हारी जो अवैध उत्खनन के लिए वर्तमान में जाना जाता है उसी पंचायत के अंतर्गत कच्चे मार्ग से होकर आता है ग्राम कोटका। इस गांव में पहुंचते ही एहसास हो जाएगा कि इस गांव की ओर आजादी के बाद से ही सरकारों का रहमों करम नहीं हुआ । गांव में आदिवासी 3 समूहों में घास फूस की झोंपड़िया बनाकर रहते हैं । जो इक्का-दुक्का सरकारी आवास बनी हुई है तो वह इन आदिवासियों ने भरपूर कीमत चुका कर सरकारी दफ्तर से हासिल किए हैं । एक एक कुटीर पर ₹50000 तक की रिश्वत लेने वाले पंचायत के तंत्र की शिकायत करने जिला मुख्यालय आईं आदिवासी महिलाओं की सुनने कोई तैयार नहीं है । आज सहरिया क्रांति दल ने ग्राम का भ्रमण किया तो भयावह स्थिति सामने आई । गाँव में राशन की दुकान का संचालन लापरवाही के साथ हो रहा है । गरीब आदिवासियों को दो 2 महीने तक राशन नसीब नहीं होता ईसा माह भी अभी तक राशन नहीं वितरित हुआ था । उस पर भी कमतौल कर राशन दिया जाता है । इसी का नतीजा है कि गांव में घूम रहे अधनंगे बच्चे लगभग कुपोषण की स्थिति में है । समय पर इस गांव में ना तो स्कूल खुलता है और ना ही आंगनवाड़ी से पोषण आहार वितरित किया जाता है । सहरिया क्रांति संयोजक संजय बेचैन के साथ सहरिया क्रांति के 7 सदस्य दल ने ग्राम का भ्रमण किया जिसमें चौपाल का आयोजन किया गया। जिस समय सहरिया क्रांति चौपाल चल रही थी उसी समय एक महिला अपनी गोद में अति कमजोर बच्चे को लिए नजर आई जिसे देखते ही इस गाँव में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति सामने आ गई । 2 बर्ष का अधिराज आदिवासी बेहद कमजोर है अभी तक उसका वजन तक आंगनवाड़ी में नहीं किया गया । उसकी हालत बेहद खराब नजर आई । उसी की तरह लगभग दर्जन भर बच्चे भी इसी हाल में थे । मामले को गंभीरता से लेते हुये सहरिया क्रांति संयोजक ने इसकी जानकारी जिला कलेक्टर को देकर तत्काल कदम उठाने की अपील की ।
जिला कलेक्टर ने तत्काल भेजा दल
सहरिया क्रांति द्वारा यह सूचना प्राप्त होते ही कि गांव में सरकारी सुविधाएं बेहाल पड़ी हुई है यहां बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं जिला कलेक्टर रविंद्र चौधरी ने तत्काल प्रशासनिक अधिकारियों का एक दल बनाकर बम्हारी ग्राम पंचायत के ग्राम कोर्ट का की ओर रवाना किया जहां जाकर प्रशासनिक अफसरों ने वस्तुस्थिति को देखा और अति कुपोषित अधिराज आदिवासी उम्र 2 साल को तत्काल स्वास्थ्य अधिकारी की गाड़ी में बैठाकर शिवपुरी एनआरसी की ओर रवाना किया। गांव में पहुंचे दल ने वहां व्याप्त अन्य व्यवस्थाओं को भी बारीकी से देखा साथ ही गांव में मौजूद अन्य कमजोर बच्चों का वजन कराने के निर्देश दिए पटवारी से लेकर स्कूल के मास्टर और ग्राम सचिव से लेकर कंट्रोल संचालक तक इस गांव की तरफ से लापरवाह बने हुये हैं ।
इनका कहना हें-
कोट्का गांव में कुपोषण की स्थिति है ये सूचना प्राप्त होते ही प्रशासनिक अफसरों का एक दल गांव में रवाना किया है। अमले की कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी