सुरेन्द्र जैन धरसींवा रायपुर
डोंगरगढ़ – संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ससंघ चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में विराजमान है | आज के प्रवचन में आचार्य श्री ने बताया कि एक मार्ग में गाड़ियाँ आ – जा रही थी | तभी आगे वाली गाड़ी के पीछे कि नंबर प्लेट के ऊपर एक लाल लाइट जली | लाल रंग खतरे (Danger) का सूचक है | और जब एक गाड़ी दूसरी गाड़ी से आगे जाना चाहती है तो हॉर्न देते हैं और सामने वाला आगे बढ़ने का ईशारा करता है तब गाड़ी आगे जाती है | इसी प्रकार कई गाड़ियों में दिन में भी लाइट चालू रखते हैं और जब सामने वाला ऊपर – निचे (Upper – Dipper) वाली लाइट से सिग्नल देता है तो वह पहले जिसने लाइट चालू किया उसकी गाड़ी पहले जाती है | लाइट भी कई प्रकार कि होती है – लाल, हरी, पिली आदि | आपको लाइट लाल दिख रही है जबकि उसके ऊपर का कवर लाल रंग का होता है और लाइट सफ़ेद ही होती है | उस लाल कवर के कारण ही आपको लाइट लाल नज़र आती है इसी प्रकार जितनी भी रंग कि लाइट आपको दिखती है वह उस कवर के रंग कि दिखती है अन्दर लाइट का रंग हमेशा सफ़ेद ही होता है | इसी प्रकार यह शरीर कवर है और आत्मा इसकी लाइट है यह शरीर कई प्रकार का हो सकता है – मोटा, पतला, लम्बा, छोटा, सफ़ेद, काला, पिला आदि परन्तु इसके अन्दर जो आत्मतत्व विद्यमान है वह सभी का एक समान ही होता है | आप लोग कहते हो कि महाराज जी आप पहले अच्छे दीखते थे अब आप वैसे नहीं दीखते हो तो हमने कहा आपने हमको अभी देखा ही कहाँ है जो आपको दिख रहा है वह तो मै हूँ ही नहीं मै जो हूँ उसे तो आप देख ही नहीं सकते | उसे देखने के लिये आपको अपना चस्मा (दृष्टिकोण) बदलना पड़ेगा | इस रहस्य को समझना बहुत कठिन है क्योंकि आज के समय में जो आपको इन आँखों से दीखता है उसे ही आप लोग सब कुछ मानते हो जबकि जो आपको नहीं दीखता वही सब कुछ है | कुछ लोग खा – पी के गाड़ी चलाते हैं उनकी गाड़ी सही चलती है और जो शराब पिते हैं वे नाशे में होते हैं | जो कम पिते हैं वो कम नशे में होते हैं और जो ज्यादा पिते है वो ज्यादा नशे में होते हैं | मोह का नशा भी शराब के नशे के समान होता है जिससे जितना सम्बन्ध रहेगा, लगाव रहेगा उससे उतना ज्यादा मोह (नशा) होता है | आपकी दुकान में कोई गरीब व्यक्ति आता है तो आप क्या कहते हो अभी जाओ बाद में आना उसको बैठने तक नहीं पूछते हो और जब कोई बड़ा आदमी (ज्यादा पैसे वाला) साहूकार आ जाये तो खडे होकर उसका अभिवादन करते हो यह सब मद (मोह) ही है | इसलिए हम आप लोगो से थोड़ी दूरी बनाये रखते हैं ताकि उधर कि हवा इधर ना आये नहीं तो हमें भी मोह का नशा लग जायेगा | जो बड़े लोग होते हैं उन्हें Strong चाहिये उनका मोह का नशा भी बहुत ज्यादा होता है और जो गरीब लोग होते हैं उन्हें Light चाहिये उन्हें मोह का नशा कम होता है | इसलिए शास्त्रों में मोह को मद (मदिरा के समान) कहा है | मोह के नशे को कम किया जा सकता है और पूरा – पूरा नशा कम करने कि औषध है हमारे पास | जो इस संसार में मोह रुपी मद (नशा) को त्याग कर सकता है वही मोक्षमार्ग में सफल हो सकता है | श्री दिगम्बर जैन चंद्रगिरी अतिशय तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन ने बताया की क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है और यहाँ प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में कक्षा चौथी से बारहवीं तक CBSE पाठ्यक्रम में विद्यालय संचालित है और इस वर्ष से कक्षा एक से पांचवी तक डे स्कूल भी संचालित हो चुका है | यहाँ गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है जिसका शुद्ध और सात्विक दूध और घी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है | यहाँ हथकरघा का संचालन भी वृहद रूप से किया जा रहा है जिससे जरुरत मंद लोगो को रोजगार मिल रहा है और यहाँ बनने वाले वस्त्रों की डिमांड दिन ब दिन बढती जा रही है | यहाँ वस्त्रों को पूर्ण रूप से अहिंसक पद्धति से बनाया जाता है जिसका वैज्ञानिक दृष्टि से उपयोग कर्त्ता को बहुत लाभ होता है|आचर्य श्री के दर्शन के लिए दूर – दूर से उनके भक्त आ रहे है उनके रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है