कर्म और न्याय के स्वामी शनि भगवान नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली ग्रहों में से एक हैं। अक्सर लोग शनि के नकारात्मक प्रभावों से घबरा जाते हैं और परेशान रहते हैं। लेकिन शनि देव को प्रसन्न करने से जातकों को कई सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हो सकते हैं। शनिवार के दिन या शनि जयंती के मौके पर आप अपनी कुंडली में शनि को मजबूत करने के लिए कुछ आसान उपाय कर सकते हैं जो बहुत ही सरल और प्रभावी साबित होंगे। आइए पहले आपको शनि देव के महत्व के बारे में बतायें।
शनि देव का महत्व
शनि देव को भगवान सूर्य और देवी छाया का पुत्र माना जाता है। ये ज्योतिषीय और खगोलीय रूप से सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है। सामान्य रूप से शनि को एक बहुत ही अशुभ ग्रह माना जाता है। इस ग्रह को नकारात्मक प्रभाव देने वाले ग्रह के रूप में बताया गया है, जो बाधाएं पैदा करता है, चीजों में देरी करता है और आपके जीवन में चल रही सभी कठिनाइयों के लिए जिम्मेदार होता है। शनि ग्रह को ज्योतिषीय और खगोलीय दोनों तरह से सूर्य से पर्याप्त गर्मी नहीं मिलती है, इसलिए उसे अंधेरे और उदासी के प्रतीक माना जाता है। लेकिन शनि काल पुरुष कुंडली में 10 वें घर के स्वामी हैं। इसलिए, एक व्यक्ति के करियर की समय सीमा और सफलता शनि पर निर्भर करती है।
शनि के नकारात्मक प्रभाव
जिनकी कुंडली में शनि कमजोर है वो हमेशा समाज से अलग और दूर रहना चाहते हैं। शनि दोष वाले जातक के शरीर में हमेशा सुस्ती और आलस रहता है। शनिदेव जातक को प्रजनन संबंधी समस्या भी देते हैं जिससे गर्भधारण और प्रसव में जटिलताएं आती हैं। खराब शनि व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन दोनों में जातक को धोखेबाज और झूठा बनाता है। जिन जातकों की जन्म कुंडली में शनि खराब स्थिति होती है, उनके जीवन में धैर्य की कमी होती है। वे चीजों को आसानी से छोड़ देते हैं और बहुत जल्द विचलित हो जाते हैं। इसकी वजह से लोग हड्डियों और पैरों से संबंधित रोगों जैसे गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोग होते हैं।
शनि के सकारात्मक प्रभाव
शनि न्याय और निष्पक्षता के स्वामी हैं। वह हमेशा व्यक्ति के कर्मों के अनुसार परिणाम देते हैं, कभी भी आवश्यकता से कम या अधिक नहीं देते हैं। शनि द्वारा दिए जा रहे परिणामों में देरी हो सकती है, लेकिन मिलेंगे जरूर और ये परिणाम बेहतर और लंबे समय तक चलने वाले होंगे। शनि व्यक्ति के जीवन में धैर्य का प्रतीक है। ये व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़े होना सिखाते हैं। शनिदेव समृद्धि और उच्च पद भी देते हैं लेकिन नौकरों और अधीनस्थों के साथ विनम्रता हो और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना हो।
शनि देव के उपाय
- शनिवार के दिन शनि चालीसा या शनि महामंत्र का पाठ करें।
- मंत्र – ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ||
- शाम को सूर्यास्त के बाद शनि मंदिर जाएं और शनिदेव को पांच चीजें अर्पित करें – सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द दाल, शमी के पत्ते, नीले फूल
- शनि चालीसा के अनुसार शनिवार के दिन पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और उसकी जड़ में सरसों के तेल या तिल के तेल का दीया जलाएं।
- अगर शनि साढ़ेसाती या शनि ढैय्या परेशान कर रही हो तो शनिवार या शनि जयंती पर छाया दान करें। मिट्टी के बर्तन में सरसों का तेल लें, खुद को उस तेल में देखें और फिर ये किसी जरूरतमंद को दान कर दें।
- शनिवार के दिन गरीबों को धातु, जूते, काले कपड़े और शनि देव से जुड़ी चीजें दान करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
- शनि को प्रसन्न करने का एक और प्रभावी उपाय यह है कि उड़द दाल को पीसकर उसे गेहूं के आटे के साथ मिलायें और छोटे गोले बनाकर मछलियों को खिलाएं।
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