वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर 15 अप्रैल से पंचक्रोशी यात्रा का शुभारंभ होगा। भक्त उज्जैन के पटनी बाजार स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर से बल लेकर 128 किलो मीटर की पद यात्रा पर रवाना होंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान नागचंद्रेश्वर शेषनाग अथवा और कृष्ण के भाई बलराम का रूप हैं। इनकी पूजा अर्चना से भक्तों को बल की प्राप्ति होती है। इसी लिए पंचक्रोशी, चारधाम आदि धार्मिक यात्रा पर जाने से पहले भक्त यहां भगवान की पूजा अर्चना कर बल लेने आते हैं।
मंदिर के पुजारी अजंनेश शर्मा ने बताया भगवान नागचंद्रेश्वर से बल लेकर जो भक्त यात्रा पर निकलते हैं, उन्हें यात्रा में किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं होता है। उन्हें इतनी शक्ति प्राप्त हो जाती है कि वे पैदल ही 128 किमी का सफर तय कर लेते हैं और पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। यात्रा संपन्न होने के बाद भगवान को बल लौटाना अनिवार्य है, अन्यथा प्राप्त शक्ति के कारण व्यक्ति एक स्थान पर बैठ ही नहीं पाता है। इसलिए पंचक्रोशी यात्री यात्रा शुरू करने से पहले भगवान नागचंद्रेश्वर को श्रीफल तथा दक्षिणा भेंट कर बल प्राप्त करते हैं और यात्रा संपन्न होने के बाद मिट्टी के घोड़े अर्पित कर बल लौटाते हैं।
नगर के चार द्वारापालों की यात्रा है पंचक्रोशी
उज्जैन नगर के चार द्वार पर शिवरूप में चार द्वार पाल श्री पिंग्लेश्वर महादेव, श्री दुर्दुरेश्वर महादेव, श्री कायावरुहणेश्वर महादेव तथा श्री बिलकेश्वर महादेव विराजित है। नगर की सुख समृद्धि, श्रेष्ठ वर्षा तथा उत्तखेती की कामना से हजारों ग्रामीण वैशाख मास की तपती दोपहर में पैदल यात्रा करते हुए इनकी पूजा अर्चना करते हैं। 128 किलो मीटर की इस पदयात्रा में करीब सात पड़ाव रहते हैं। यहां यात्री भोजन विश्राम करते हैं।
तय तिथि से दो दिन पहले शुरू हो जाती है यात्रा
धार्मिक मान्यता के अनुसार वैशाख कृष्ण दशमी पर यात्रा का शुभारंभ होता है तथा वैशाख अमावस्या के दिन यात्रा संपन्न होती है। लेकिन सालों से यात्री भीड़ से बचने के लिए निर्धारित तिथि से दो दिन पहले यात्रा की शुरुआत कर देते हैं। बताया जाता है इस बार भी 13 अप्रैल को पहला जत्था यात्रा पर रवाना हो जाएगा।
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