हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 से शुरू होगा। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 मार्च 2023 की रात 10:52 बजे से शुरू होकर अगले दिन 22 मार्च 2023 की रात 8:20 मिनट पर समाप्त होगी।
उदया तिथि के अनुसार, 22 मार्च 2023 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी। वहीं, इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च की सुबह 06:29 से सुबह 07:39 बजे तक रहेगा। यह समय केवल 1 घंटा 10 मिनट का ही रहेगा। इसके अलावा घटस्थापना का अमृत काल सुबह 11:07 बजे से 12:35 तक रहेगा।
चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना विधिः-
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि मां देवी को पूरी तरह से समर्पित होते हैं। नवरात्रि के पहले ही दिन घट-स्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। यह दिन बेहद विशेष होता है। अतः कलश स्थापना शुरू करने से पहले सूर्य के उदय होने से पहले उठ जाएं और मां धरती का आशीर्वाद लेते हुए, नहा धोकर स्वच्छ कपड़े पहने। इसके बाद जिस स्थान पर कलश को स्थापित करना है उस स्थान को साफ कर लें और लाल रंग का कपड़ा बिछाकर मां देवी की प्रतिमा स्थापित करें। कपड़े पर थोड़े चावल रख ले। एक छोटी सी मिट्टी के पात्र में जौ रख दें। उस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश पर स्वास्तिक बना लें और उसमें अक्षत, सिक्का, साबुत सुपारी डालकर पान के पत्ते रखें। एक नारियल ले उस पर चुनरी से लपेट लें और कलश से बांधे। कलश के ऊपर उस नारियल को रख ले और मां माता रानी का आह्वान करें। इसके बाद दीपक, सिंदूर, अक्षत, दही, फूल, फल आदि का आह्वान करते हुए कलश की पूजा करें। ज्ञात हो नवरात्रि के पूरे दिन मां देवी की पूजा तांबा या पीतल की कलश से करें।
११० वर्ष बाद बन रहा है शुभ संयोगः-
पंचांग के अनुसार इस साल मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आ रही हैं। जिसे सुख-समृद्धि कारक कहा जाता है। वहीं इस साल 110 साल बाद शुभ योग बन रहा है। क्योंकि इस बार नवदुर्गा पूरे 9 दिन की रहेंगी। वहीं प्रतिपदा के दिन 5 राजयोग (नीचभंग, बुधादित्य, गजकेसरी, हंस और शश) बन रहे है।
अलग-अलग राज्यों में हिंदू नव वर्ष २०२३
हिंदू नव वर्ष के दिन सिंधि समाज के लोग चेटी चंड का पर्व, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक में युगादि और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में उगादी, गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय के लोग संवत्सर पड़वो, कश्मीर में नवरेह, मणिपुर में सजिबु नोंगमा पानबा का पर्व मनाते हैं।

–आचार्य हर्षवर्धन सिंह सोलंकी
ज्योतिषाचार्य व रत्न विशेषज्ञ
रक्षत्रा जेम्स भोपाल