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चिंता के बादल:15 किमी प्रति घंटे से चली हवा, गेहूं की फसलें आड़ीं, बारिश हुई तो दाने की चमक होगी कम

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शिवलाल यादव रायसेन

शनिवार की शाम शहर सहित जिले के कई क्षेत्र में तेज हवाओ के साथ हुई बारिश से किसानों की फसलें आड़ी हुईं। पिछले दो दिन से आसमान पर छाए हल्के बादलों से मौसम में परिवर्तन हुआ और शनिवार शाम 10 से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चली। इससे कई गांवों में फसलें आड़ी हो गईं ।जबकि इस दौरान हुई हल्की बारिश से कटी पड़ी फसलों को नुकसान होने का अंदेशा है। कृषि वैज्ञानिकों डॉ स्वप्निल दुबे के अनुसार यदि तेज बारिश होती है तो फिर गेहूं के दाने की चमक पर असर पड़ेगा। मौसम में हुए बदलाव के कारण किसान चिंतित हैं। शनिवार शाम को अचानक मौसम बदला। इस दौरान तेज हवा चलने लगी और फिर बूंदाबांदी शुरू हो गई। कई स्थानों में तेज हवाओं के साथ हल्की गरज चमक के साथ वे मौसम हल्की बारिश हुई जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

चमकती बिजली ने बढ़ाई चिंता….
खनपुरा के किसान सलीम खान आमा के सुरेश शर्मा प्रकाश पाठक जिया लाल बघेल ने बताया कि शाम के समय चली तेज हवा से उनकी फसलें आड़ी हो गई हैं। गोपालपुर के के मनोज कुशवाह विशाल कुशवाहा ने बताया कि तेज हवा के साथ बिजली चमक रही है। शाम 6 बजे तक बारिश तो नहीं हुई ।लेकिन यहां पर तेज हवा ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। पैमत के किसान बदामी पटेल पेनगवा के उन्नत शील किसान राजेन्द्र बाबू राय धनोरा के मनोहर मेहरा ने बताया कि उनकी पांच एकड़ में बोई गेहूं की फसल आड़ी हो गई। जिले में सबसे तेज हवा गैरतगंज तहसील और सिलवानी तहसील क्षेत्र में चली है। वहीं पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश भी हुई है।रायसेन में इस साल पौने 2 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया है।
हवा और बारिश से फसलों को इस तरह होता है नुकसान….चमक में फीकापन: उपसंचालक कृषि अधिकारी एनपी सुमन ने बताया कि पकी हुई फसल पर जब बारिश हो जाती है तो जो गेहूं का दाना होता है उसकी चमक फीकी पड़ जाती है। गेहूं का रेट उसके दाने की चमक पर ही मिलता है। यदि चमक कम हो जाती है तो फिर प्रति क्विंटल 200 से 300 रुपए भाव में अंतर आता है।
चने में भी समस्या

चना फसल में भी बारिश होने से नुकसान होता है। कई जगह चना फसल पककर तैयार है तो कुछ जगह पकने को है। चना की फसल पर इस समय बारिश होने से इसका दाना दागी हो सकता है। इस कारण प्रति क्विंटल 300 से 500 रुपए तक भी कम मिलते हैं। फसल आड़ी होने से नुकसान: यदि फसल आड़ी हो जाती है तो इसके उत्पादन पर तो खास असर नहीं पड़ता है लेकिन इसकी गुणवत्ता कई बार प्रभावित हो जाती है। फसल कटाई करने में भी परेशानी होती है। कई जगह उत्पादन पर भी असर दिखाई देता है।
70 फीसदी फसल पक चुकी….
यहां पर 50 से 60 फीसदी गेहूं की फसल कट चुकी है। इस पूरे 9 तहसील क्षेत्र में 70 फीसदी गेहूं की फसल पक चुकी है। इसी तरह जहां अरली वैरायटी नहीं बोई है तो वहां पर फसलें हरी हैं और तेज हवा चलने के कारण वह आड़ी हो गईं। इसी तरह जिन खेतों में फसल पककर तैयार है वह भी तेज हवा से गिर गई। इससे किसानों को नुकसान होगा।

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