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डॉ गौरीशंकर जी शेजवार के जन्मदिन पर विशेष ::राजनीति के अपराजित योद्धा डॉ शेजवार

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आलेख

हरीश मिश्र

 

47 साल से राजनीति शास्त्र के अन्वेषी, सामाजिक विज्ञान के अन्वेष्टा,कृषि विज्ञान के अनुसंधानकर्ता और शब्दों के अन्वेषणकर्ता डॉ गौरीशंकर शेजवार के व्यक्तित्व को समझने और देखने का सबका अपना-अपना नज़रिया है। परिजनों, मित्रों, सहयोगियों के लिए हितैषी , विरोधियों के लिए शोध का विषय और वैचारिक विरोधियों के लिए अपराजित योद्धा। वैचारिक विरोधी चर्चा के अंत में यह जरुर कहते हैं, बेजोड़ व्यक्तित्व है डॉक्टर साहब का!

डॉ शेजवार की अद्भुत राजनैतिक,सामाजिक और प्रशासनिक दक्षता को आज 47 वर्ष हो गए। 1977 में 27 साल की उम्र में पहली बार विधानसभा की चौखट पर दस्तक दी थी। तब से लेकर आज तक कार्यकर्ता से समस्या को सुनना और उसका समाधान उनके शब्द कोष में समाहित है। परिस्थिति कैसी भी हो, परिणाम कुछ भी आए, जिसका साथ दिया, मतलब दिया।

पत्रकार के नाते कई गंभीर विषयों पर चर्चा करने और सुनने का अवसर मिला। किसी भी मुद्दे पर उनका तार्किक विश्लेषण, प्रकटीकरण अद्भुत है। एक दिन चर्चा में कहा  मिश्रा जी ! ” धार्मिक होना गलत नहीं है, कट्टर होना गलत है। धार्मिक होने का अर्थ है सर्वोच्च सत्ता ईश्वर के प्रति समर्पण । जबकि कट्टरपंथी का अर्थ है हठधर्मिता के प्रति समर्पण । मैं सर्वोच्च सत्ता ईश्वर के प्रति समर्पित हूं! मैं हिंदू हूं ! यह गर्व का विषय है ! हठधर्मिता नहीं।”

वक्ता के रूप में वे बड़े ही प्रखर और प्रभावशाली हैं। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के जन्म दिन पर वरिष्ठ कार्यकर्ता सम्मान समारोह में मंत्रमुग्ध होकर उन्होंने हुंकार भरी … भारतीय जनता पार्टी की अपनी विचारधारा है…धारा 370 हटेगी… मतलब हटेगी…राम मंदिर बनेगा… मतलब बनेगा..समान नागरिक संहिता लागू होगी… मतलब होगी..जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी ..जोश के साथ होश में अभिव्यक्त की गई हुंकार का परिणाम आज सामने है… परिस्थितियां बदलीं… समय अनुकूल हुआ.. धारा 370 हटी… राम मंदिर बना अब समय आ गया है… समान नागरिक संहिता लागू होगी ।

डॉ शेजवार ने 1977 से 2022 तक राजनीति के कई युद्ध लड़े, जीते-भी, हारे भी…कई बार षड्यंत्रों के शिकार हुए… लेकिन कभी समर भूमि में पीठ नहीं दिखाई । वह कहते हैं “सच्चा योद्धा समर भूमि में अपनी जान दे देता है लेकिन पीठ नहीं दिखाता।”

जी हां ! राजनैतिक मूल्यों की गिरावट ने इस योद्धा के वसंत छीनने के षड्यंत्र किए, लेकिन जब-जब घनघोर अंधेरा छाया…तब-तब अपनी असीम शक्ति का संचय कर… अपने समर्थकों को विश्वास दिलाया..अंधेरा हटेगा…पतझड़ जाएगा…. बसंत_आएगा…कमल मुदित होगा… मतलब होगा…जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी!

उनकी वाक्पटुता, मंद मुस्कान, हास्य, व्यंग्य सभी अद्वितीय हैं। वे स्पष्टवादी हैं। सिद्धांत से किसी शर्त पर समझौता नहीं, कर्म को प्रधानता, परिणाम की चिंता नहीं। ऐसा ही व्यक्तित्व है डॉ गौरीशंकर शेजवार का। कार्यकर्ताओं से प्राप्त
आदर और श्रद्धा ही उनकी असली कमाई है।

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