इस साल पितृों का विसर्जन 25 सितंबर को हो जाएगा। पितृ अमावस्या को पित- विसर्जन अमावस्या कहते हैं, इस दिन पितरों को विदाकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। इस बार पितृपक्ष की अमावस्या तिथि पर मोक्ष अमावस्या का योग बन रहा है। यह योग बहुत ही उत्तम फलदायी है। इस योग में किए गए तर्पण से पितर मनचाहा आशीर्वाद देकर जाएंगे। इस तिथि पर मात्र जल तर्पण से पितृ न सिर्फ तृप्त होंगे अपितु उनके आशीर्वाद से सफलता और समृद्धि के द्वार भी खुलेंगे।
पितृपक्ष में ऐसा शुभ संयोग पांच साल बाद बन रहा है। भाद्रपद की पूर्णिमा का एक दिन और अश्विन कृष्णपक्ष के 15 दिन को मिला कर 16 दिन के श्राद्ध होते हैं। 25 सितंबर को रविवार और सर्वपितृ अमावस्या का सुयोग इसे मोक्ष अमावस्या की श्रेणी प्रदान कर रहा है। उसी दिन धृति योग भी बन रहा है। धृति योग के स्वामी जल देवता हैं इसलिए उस दिन पितरों का जल से तर्पण का विशेष महत्व और प्रभाव वाला होगा।
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