रामलीला में राम वनवास, भरत को राजगद्दी और दशरथ मरण का हुआ सजीव मंचन
प्रभु श्रीराम को वन जाते देख नम हुईं श्रद्धालुओं की आंखें
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के ग्राम अंबाडी और रेलवे स्टेशन दीवानगंज सेमरा में चल रही रामलीला में भगवान श्रीराम के वनवास और केवट संवाद का भावपूर्ण मंचन किया गया। अंबाडी में राजा दशरथ और कैकेयी के बीच संवाद, मंथरा के षड्यंत्र तथा श्रीराम के वनवास के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं सेमरा में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन गमन, केवट की भक्ति और राजा दशरथ के वियोग में प्राण त्यागने के दृश्यों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
मंथरा के बहकावे में आईं कैकेयी, मांगे दो वरदान
ग्राम अंबाडी के श्री गणेश चौक सदर बाजार में आयोजित रामलीला में मंथरा-कैकेयी संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। मंथरा ने कैकेयी को राजा दशरथ द्वारा पूर्व में दिए गए दो वरदानों की याद दिलाई। उसके बहकावे में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजपाट और भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा।

कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठे। वे श्रीराम से अत्यंत प्रेम करते थे, लेकिन वचनबद्ध होने के कारण असहाय नजर आए। पिता की पीड़ा को समझते हुए भगवान श्रीराम ने बिना किसी विरोध के वन जाने का निर्णय लिया। इसके बाद माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास के लिए प्रस्थान कर गए। श्रीराम को अयोध्या छोड़कर जाते देख दर्शक भावुक हो उठे।
सेमरा में केवट की भक्ति ने जीता श्रद्धालुओं का दिल
इधर, रेलवे स्टेशन दीवानगंज सेमरा में चल रही रामलीला में श्रीराम वनवास और केवट संवाद का सजीव मंचन किया गया। वन गमन के दौरान जब भगवान श्रीराम नदी पार करने के लिए केवट से नाव मांगते हैं, तो केवट उनकी भक्ति में भावविभोर हो जाता है। केवट द्वारा प्रभु श्रीराम के चरण धोने और उन्हें नाव से नदी पार कराने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
कलाकारों ने केवट की निष्काम भक्ति और भगवान श्रीराम के प्रति उसकी श्रद्धा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद राजा दशरथ के पुत्र वियोग में व्याकुल होने और अंततः प्राण त्यागने के प्रसंग का मंचन किया गया। इन दृश्यों ने रामलीला देखने पहुंचे श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
स्थानीय कलाकार कर रहे हैं मंचन
दोनों गांवों में रामलीला के मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। स्थानीय कलाकार संवादों और अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर रहे हैं। रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को मर्यादा, त्याग, वचन पालन, पारिवारिक प्रेम और भक्ति का संदेश मिल रहा है। रामलीला का मंचन देर रात तक चल रहा है जिसको देखने के लिए दीवानगंज, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, सरार, बालमपुर, देहरी, छोला, बनखेड़ी, नरखेड़ा, कुलहड़िया, शाहिद आसपास के ग्रामीण अंचलों से भक्तगढ़ पहुंच रहे हैं।