– दिव्यांगजन कल्याण एवं सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा
रंजीत गुप्ता
भोपाल।सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार विमर्श और राज्य में संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तरीय दिव्यांगन सलाहकार बोर्ड का गठन किया गया है। राज्य स्तरीय दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड की पहली बैठक सोमवार को सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में संचालनालय, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग, भोपाल में आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर, दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया सहित बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में राष्ट्रीय न्यास के सदस्य डॉ पंकज मारू, नागदा सक्षम के सचिव रविन्द्र कोपरगाँवकर,प्रीति तांबे,भोपाल मिताली बनर्जी जबलपुर,दीपक गोयल शिवपुरी ,डॉ सचिन श्रीवास्तव भोपाल, राजेश शुक्ल खंडवा,निरंजन गुर्जर मुरैना,पूजा गर्ग इंदौर, अपर कलेक्टर मुकुल गुप्ता, सीएमओ मिनी अग्रवाल नलखेडा समेत अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष सहायता निधि स्थापित करने और उन्हें प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही राज्य दिव्यांग खेल प्राधिकरण के गठन पर भी विचार किया गया, जिससे खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिल सके। ग्वालियर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र के उपयोग में राज्य को अधिक अधिकार देने तथा दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट मैदान विकसित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने पर सहमति बनी।
दिव्यांगजनों की स्वास्थ्य एवं पहचान संबंधी सुविधाओं को सरल बनाने के लिए UDID कार्ड के साथ ही आयुष्मान कार्ड जारी करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही UDID कार्ड निर्माण हेतु निजी अस्पतालों एवं चिकित्सकों को अधिकृत करने और मनरेगा में कार्यरत परिजनों की मजदूरी प्रभावित न हो, इसके लिए विशेष प्रावधान करने पर भी चर्चा हुई।
प्रत्येक जिले में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे दिव्यांगजनों की विभिन्न समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर हो सके। साथ ही जिला स्तर पर दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के गठन तथा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत लोकल लेवल कमेटी की बैठक हर तीन माह में आयोजित करने पर जोर दिया गया। बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए लीगल गार्जियनशिप प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा “घरौंदा योजना” के अंतर्गत प्रत्येक जिले में केंद्र स्थापित करने पर विचार किया गया।
दिव्यांगजनों के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए NHFDC के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने तथा संबंधित बैंकों को योजनाओं की जानकारी से अवगत कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक जिला मुख्यालय में दिव्यांगजनों के लिए दुकानों का आरक्षण और कैंटीन/व्यवसाय से जुड़े विज्ञापनों की जानकारी सभी स्वैच्छिक संस्थाओं तक पहुंचाने पर भी बल दिया गया।
सार्वजनिक भवनों की सुगम्यता सुनिश्चित करने के लिए एक्सेस ऑडिट कराने और विशेष सोशल ऑडिट टीम के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया। भोपाल के वॉटर स्पोर्ट्स पार्क सहित अन्य स्टेडियमों में दिव्यांगजनों के लिए वॉटर स्पोर्ट्स की व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमति बनी।