सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के प्रति व्यापारियों को जागरूक करने के सरकार के दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। सोमवार को गैरतगंज में आयोजित फॉस्टक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रचार-प्रसार के अभाव में महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। आलम यह रहा कि विभाग ने चंद व्यापारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम निपटाकर इतिश्री कर ली।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा केव्हीजीव्हीएम के तत्वावधान में इस विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया था। इसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी कल्पना आरशिया मुख्य रूप से मौजूद रहीं। नियमतः इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र के खाद्य व्यवसायियों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षित करना था जिसमे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के कड़े प्रावधान, व्यवसाय स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने के मानक, खाद्य पदार्थों के रखरखाव की तकनीकी जानकारी सहित अन्य बिंदु शामिल है। हैरानी की बात यह है कि जिस प्रशिक्षण का उद्देश्य व्यापक जागरूकता फैलाना था, उसकी जानकारी क्षेत्र के अधिकांश व्यापारियों तक पहुँची ही नहीं। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि विभाग ने कार्यक्रम का उचित प्रचार-प्रसार नहीं किया, जिसके कारण वे इस महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रह गए। विभाग ने कुछ ही लोगों को बुलाकर कागजी खानापूर्ति पूरी कर ली। उधर शासन एक ओर मुहिम चलाकर व्यापारियों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों की लापरवाही इस मंशा को पलीता लगा रही है।”
सवालों के घेरे में विभाग
इस तरह के “बंद कमरे” में होने वाले आयोजनों से शासन के बजट और उद्देश्यों दोनों का नुकसान हो रहा है। व्यापारियों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि यदि उन्हें नियमों की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, तो भविष्य में होने वाली विभागीय कार्यवाहियों के लिए जिम्मेदार कौन होगा?