“बिना दृष्टि, बिना दिशा और बिना रोडमैप का बजट; किसान, गरीब, युवा और महिलाओं के सपनों पर पानी”
सुरेंद्र जैन धरसीवा
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के अध्यक्ष भावेश बघेल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को देश की आम जनता, किसानों, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग के साथ किया गया एक बड़ा छल बताया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने 85 मिनट का लंबा भाषण दिया, परन्तु पूरा बजट आम नागरिक के लिए खाली पिटारा साबित हुआ। देश महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता से कराह रहा है, और आम जनता इस बजट से राहत की उम्मीद लगाए बैठी थी। लेकिन न महंगाई पर कोई नियंत्रण की योजना दिखाई दी, न रोजगार सृजन का कोई खाका, और न किसानों, महिलाओं या युवाओं के लिए कोई ठोस घोषणा।
भावेश बघेल ने कहा कि बजट पेश होते ही शेयर बाज़ार का गिरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश का व्यापारी और कारोबारी वर्ग भी इस बजट से बेहद निराश है। उन्होंने कहा कि बजट सिर्फ आय-व्यय का दस्तावेज नहीं होता बल्कि सरकार की नीयत, नीति और भविष्य की दिशा का पॉलिसी डॉक्यूमेंट होता है। लेकिन यह बजट पूरी तरह दिशाहीन, उद्देश्यहीन और बिना रोडमैप का है। “विकसित भारत बजट” का दावा सिर्फ एक नारा है, वास्तविकता में यह बजट कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों के हित साधने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे चुनावी राज्यों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए कई योजनाएँ और पैकेज घोषित किए गए, लेकिन छत्तीसगढ़ को फिर एक बार पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया। प्रदेश में भाजपा के 10 सांसद और एक केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद मोदी सरकार के सामने छत्तीसगढ़ के हितों को उठाने का इनके पास न नैतिक साहस है, न इच्छाशक्ति। “डबल इंजन सरकार” का दावा एक बार फिर जुमला साबित हुआ और छत्तीसगढ़ के हिस्से में न कोई नई योजना आई, न कोई पैकेज, न कोई राहत।
भावेश बघेल ने कहा कि 86% भारतीय आयकर की बेसिक छूट सीमा को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किए जाने की मांग कर रहे थे, क्योंकि 12 वर्षों में महंगाई दोगुनी हो चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार ने मध्यम वर्ग के साथ क्रूर मजाक करते हुए टैक्स छूट सीमा में 1 रुपया भी नहीं बढ़ाया। इसी तरह किसानों को MSP की कानूनी गारंटी नहीं, युवाओं के लिए रोजगार सृजन की कोई ठोस नीति नहीं, और महिलाओं के लिए आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा का कोई नया कदम नहीं दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य ₹92 तक पहुँच चुका है और सिर्फ इस वर्ष में 6.5% की गिरावट दर्ज हुई है। प्रधानमंत्री स्वयं कहा करते थे कि “रुपया गिरता है तो प्रधानमंत्री की साख गिरती है”—तो क्या आज भाजपा इस सच्चाई को स्वीकार करने का नैतिक साहस दिखाएगी?
भावेश बघेल ने कहा कि यह बजट देश के विकास का नहीं, बल्कि राजनीतिक हितों और चुनिंदा पूंजीपतियों के लाभ की मानसिकता से तैयार किया गया है। आम जनता, किसान, मजदूर, युवा और मध्यम वर्ग इसका दर्द महसूस कर रहे हैं और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देंगे।