बम्होरी में प्रशासनिक नाकामी का विस्फोट, स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह फेल,नागरिकों का फूटा गुस्सा, बाजार बंद
इलाज के अभाव में युवक की मौत, फिर भी तीन साल से नहीं जागा प्रशासन
बम्होरी रायसेन। कस्बा बम्होरी में जो हो रहा है, वह आंदोलन नहीं बल्कि प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ जनता का फूट पड़ा गुस्सा है। बीते तीन वर्षों से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बम्होरी बिना डॉक्टर के चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए रहे। नतीजा— लोगों की जान जा रही है और अब पूरा कस्बा सड़कों पर है।
शनिवार सुबह से ही बम्होरी के नागरिकों और व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। बाजार पूरी तरह ठप है। एक ही मांग है— तत्काल MBBS डॉक्टर की नियुक्ति और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारना।
युवक की मौत, प्रशासन पर खड़े हुए सवाल
34 वर्षीय युवक अंकित राठी की इलाज के अभाव में मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि यह मौत बीमारी से नहीं, बल्कि डॉक्टर की अनुपस्थिति और प्रशासनिक लापरवाही से हुई है।
लोग पूछ रहे हैं— अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर होता, तो क्या आज अंकित जिंदा नहीं होता?
तीन साल से ज्ञापन, आवेदन, चेतावनियां — लेकिन कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों ने बताया कि प्रभारी मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और क्षेत्रीय सांसद शिवराज सिंह चौहान तक को बार-बार आवेदन दिए गए। अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिले, समाधान नहीं।
यह साफ संकेत है कि ग्रामीणों की जान प्रशासन की प्राथमिकता में ही नहीं है।

झंडा चौक पर हजारों लोग, प्रशासन को खुली चेतावनी
शुक्रवार को हजारों की संख्या में लोग बम्होरी के झंडा चौक पर जमा हुए और अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि“जब तक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं आएगा, तब तक बाजार बंद रहेगा और आंदोलन जारी रहेगा।”

अनिश्चितकालीन बंद, हालात बिगड़े तो जिम्मेदार कौन?
फिलहाल बम्होरी में अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। लोग धरने पर बैठे हैं और हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भविष्य में कोई और जान जाती है या आंदोलन उग्र होता है, तो उसकी पूरी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी।