रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
भोपाल शहर से लगी चिनार ड्रीम सिटी कॉलोनी के डी-304 में रहने वाले 77 वर्षीय बुजुर्ग प्रीतम गिरी गोस्वामी की मौत ने पुलिस, सोसाइटी प्रबंधन और लिफ्ट मेंटेनेंस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला न केवल लापरवाही का है, बल्कि संवेदनहीनता और जिम्मेदारी से बचने की तस्वीर भी पेश करता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रीतम गिरी गोस्वामी 6 जनवरी, मंगलवार को दोपहर के समय घर से मंडीदीप जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन शाम तक घर वापस नहीं लौटे। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उनके बेटे मनोज गोस्वामी द्वारा 7 जनवरी को पुलिस थाना मिसरोद में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

गुमशुदगी के बाद भी पुलिस ने नहीं की मदद
परिवार का आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज होने के बाद भी मिसरोद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। न तो सोसाइटी परिसर की तलाशी ली गई और न ही लिफ्टों की जांच की गई। परिजन लगातार थाने के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता रहा। इस पूरे मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही और कथित तौर पर काली कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
लिफ्ट के नीचे दबा मिला बुजुर्ग का शव
कई दिनों बाद प्रीतम गिरी गोस्वामी का शव चिनार ड्रीम सिटी की लिफ्ट के नीचे दबा हुआ मिला। तब तक शव की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। आशंका जताई जा रही है कि लिफ्ट के खराब होने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें बुजुर्ग की मौके पर ही या गंभीर चोटों के चलते मौत हो गई।
चिनार ड्रीम सिटी सोसाइटी की बड़ी लापरवाही
रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी की लिफ्टें लंबे समय से खराब पड़ी हुई हैं। कभी लिफ्ट चलती है तो कभी अचानक बंद हो जाती है। कई बार इसकी शिकायत सोसाइटी प्रबंधन से की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। न तो लिफ्टों की नियमित मरम्मत कराई गई और न ही सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए।
इस हादसे के बाद साफ हो गया है कि सोसाइटी प्रबंधन की लापरवाही और पुलिस की निष्क्रियता ने मिलकर एक बुजुर्ग की जान ले ली। अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।