हमारा कर्तव्य है कि हम दूसरों की मदद करें: श्याम शिवहरे
रिपोर्ट धीरज जॉनसन दमोह
स्थानीय प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस ज्ञानचंद श्रीवास्तव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के द्वारा संविधान लागू होने के 75 वें वर्ष के उपलक्ष्य में संविधान दिवस पर हमारा संविधान हमारा स्वाभिमान, विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता भूतपूर्व प्राध्यापक जितेन्द्र गुरू ने की वहीं विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार नरेंद्र दुबे, भाजपा के जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे और जनपद सदस्य संगीता श्रीधर रही। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ आलोक जैन वरिष्ठ प्राध्यापक डां. एसके अग्रवाल, डॉ हरिओम दुबे और कार्यक्रम की संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ इंदिरा जैन की विशेष उपस्थिति रहीं। संगोष्ठी में राजनीति विज्ञान के एम ए प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और अतिथियों का स्वागत शॉल श्रीफल से किया गया।

विषय प्रवर्तक के रूप में डां इंदिरा जैन ने विषय की शुरुआत करते हुए कहा कि संविधान राष्ट्र की अभिव्यक्ति के साथ शुरू होता है जिसमें हम सांस लेते हैं यह सिर्फ अक्षरों का समूह नहीं,बल्कि जीवन मूल्यों का लिपिबद्ध दस्तावेज है सैकड़ो वर्षों की ग़ुलामी के पश्चात सुनहरे भविष्य की आशा के साथ विकास के नये आयाम को स्थापित करने एवं ग़लतियों को दूर करने और सुधारने का मौका मिला।

श्याम शिवहरे ने कहा आजादी के पहले भी अधिकार थे परंतु उस समय गुलाम के नाते अधिकार दिए गए थे। आजादी के बाद मूल अवधारणा में स्वतंत्रता व अधिकार मिले पर अधिकार क्षेत्र कितना है यह अवधारणा में आया, 1000 पहले से हम विश्व को ज्ञान प्रदान करते आ रहे है अब हम फिर उस स्थिति में पहुंच रहे है आपकी भी जिम्मेदारी बढ़ रही है। लाभ मिला है पर दुरुपयोग ना हो। सबकी मदद करना हमारा कर्तव्य है। संविधान की रक्षा नागरिकों से होती है शासन प्रशासन के साथ आप की भी जागरूकता होनी चाहिये मतदाता सूची का निरीक्षण करें। मतदान कर्तव्य और प्रमाण है।
नरेंद्र दुबे ने कहा सफलता और सार्थकता दिखाई देनी चाहिए। महाविद्यालय में महान विचारों का चिंतन हो।हम संविधान का अमृत उत्सव मनाने जा रहे हैं। हिंदुस्तान की संस्कृति, विरासत ऐसी है जो हमें टूटने नहीं देती है। देश विविधताओं से भरा है हमें एकजुटता दिखानी होगी। अधिकार के साथ कर्तव्यों का क्रियान्वयन करना है। राष्ट्र है तो हम हैं।

डॉ जितेंद्र गुरु ने कहा कि जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए, समाज के लोग जागरूक होंगे तो जाति के आधार पर यह भेदभाव भी समाप्त होगा। संविधान लोगों को समानता प्रदान करता है,राज्य और जनता के बीच संबंधों की व्याख्या करता है। हमारा संविधान हस्तलिखित संविधान है। अच्छी चीज हमने अन्य संविधानों से ग्रहण की है। अराजकता की स्थिति ना हो इसलिए संविधान होना जरूरी है,अनुसरण करने वाले अच्छे होंगे संविधान अच्छा होगा। छात्र यशस्वी तिवारी, निकिता जैन,अजय कुशवाहा, अनुराग पटैरिया, सतीश अहिरवार, माधव काछी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर डॉ पवन जैन, डॉ एम एम महंत,एन पी कुमार, एकता मसीह, नाजनीन बेगम,बीडी रैकवार, धीरज जानसन, डॉ ऋषिभा, शिवा जैन सहित महाविद्यालय स्टाफ और छात्र छात्राओं की उपस्थिति रहीं।कार्यक्रम का संचालन डॉ अनिल जैन और आभार डॉ हरिओम दुबे ने व्यक्त किया।