मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर इन दिनों कई पशु लम्पी वायरस से पीड़ित हालत में घूमते देखे जा रहे हैं। संक्रमित पशुओं के शरीर पर गांठें और सूजन दिखाई दे रही हैं। इससे राहगीरों में संक्रमण को लेकर डर बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों में लम्पी वायरस ने दस्तक दे दी है। कई दिनों से पशुओं में लम्पी वायरस देखा जा रहा है। लंपी वायरस जिसे लंपी त्वचा रोग वायरस के रूप में भी जाना जाता है। वास्तव में एक प्रकार का प्राक्सवायरस है जिससे गोवंश एवं महिषवंश बुरी तरह संक्रमित हो जाते हैं इस बीमारी से मवेशियों के शरीर में गांठ बन जाती है जो बाद में घाव का रूप ले लेती है यह घाव मवेशी के पूरे शरीर में काफी तेजी से फैलता है। मतलब एक जानवर के शरीर में सैकड़ों घाव बन जाते हैं जिससे मवेशी को बुखार आ जाता है, भूख नहीं लगती, नाक बहने लगती है, आंख से पानी आने लगता है, इससे संक्रमित जानवर की सही उपचार न मिलने से मौत भी हो सकती है। लंबी वायरस से प्रभावित जानवरों की मौत होने की दशा में सरकारी मुआवजे का प्रावधान भी नहीं है।
दीवानगंज के पास स्थित देहरी गांव निवासी अमर सिंह मीणा के पशु में लम्पी वायरस कुछ दिन पहले देखा गया था। अमर सिंह मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ दिनों से बछड़े के ऊपर छोटी-छोटी गांठ दिखाई दी थी लेकिन अब यह गांठ काफी बड़ी हो गई है। मैंने बछड़े का इलाज भी कराया था मगर इलाज का कोई फायदा नहीं हुआ। दिनों दिन गांठ बड़ी होती चली गई। अब बछड़े के पूरे शरीर पर गांठ ही गांठ दिखाई देने लगी है। मैंने हाईवे 18 पर बैठे कई पशुओं में लंबी वायरस भी देखा है। लम्पी वायरस धीरे-धीरे कई पशुओं में फैल रहा है।
इन दिनों लंपी वायरस से प्रभावित मवेशी सड़क में ही देखे जा सकते हैं। खासकर भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर कई पशु लंपी वायरस से पीड़ित हैं भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित कूल्हाड़िया पर लंपी वायरस से पिछले वर्ष दो बछड़े की मौत भी हो चुकी है। पशुपालक मवेशियों में लंबी वायरस का प्रकोप देखकर काफी चिंतित और परेशान है पर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं। लंपी वायरस का मामला सामने आने के बाद से पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग ने एहतियातन कदम उठाने के साथ इस रोग से बचने के लिए जमीनी अमले को बड़े पैमाने पर टीकाकरण करने का लक्ष्य दिया था। इसके बावजूद भी क्षेत्र में लंपी वायरस का प्रकोप धीरे-धीरे फैल रहा है जिस पशु में लंपी वायरस मिलता है उसे पशु को अन्य पशुओं से अलग रखा जाता है मगर इन आवारा पशुओं को कैसे अलग रख सकते हैं यह एक झुंड में साथ रहते हैं और रात के समय एक ही साथ एक ही जगह बैठते हैं इनको रखने वाले भी इन पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे बीमार पशुओं का इलाज कराने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की मांग की है।