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वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती में नवाचार: किसानों के लिए प्रेरणा,दिया उन्नत बीजों का लाभ

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धीरज जॉनसन दमोह

जिले के पथरिया ब्लॉक के मिर्जापुर गांव के युवा किसान कुलदीप पटेल ने वैज्ञानिक पद्धतियों से खेती करके न सिर्फ अपनी पैतृक जमीन पर उत्पादन क्षमता बढ़ाई,बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराकर एक नई दिशा दी है। कुलदीप अब तक सैकड़ों किसानों को उच्च उत्पादन क्षमता और मौसम अनुकूल किस्मों के बीज उपलब्ध करा चुके हैं।

बीज प्रौद्योगिकी से मिली नई राह

सन 2021 में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से बीज प्रौद्योगिकी (Seed Technology) में स्नातक करने के बाद कुलदीप ने विभिन्न कृषि अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया। उन्होंने भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी सहित कई राष्ट्रीय संस्थानों का दौरा कर बीज प्रोसेसिंग, फसल प्रबंधन और अधिक उत्पादन के तरीकों की बारीकियां सीखीं।

मसूर, चना, हरा मटर, गेहूं और सोयाबीन की नई किस्मों के बीज स्वयं लेकर खेतों में परीक्षण (डेमो प्लॉट) लगाए। बेहतर किस्म की पहचान कर उन्होंने अन्य किसानों को बीज उपलब्ध कराए, जिनसे किसानों की पैदावार में वृद्धि हुई।

वैज्ञानिक खेती के लाभ

कुलदीप बताते हैं कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर कम क्षेत्र में अधिक पैदावार, गुणवत्ता युक्त फसल, उचित दवाई छिड़काव और उर्वरक प्रबंधन संभव होता है। नई किस्मों के बीजों से उत्पादन बढ़ता है और किसान बाज़ार में बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया को किसानों तक जानकारी पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनाया है। फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब पर वे नियमित रूप से किसानों को उन्नत बीज, फसल प्रबंधन और कृषि तकनीक से जुड़े टिप्स साझा करते हैं।

अनुसंधान संस्थानों से सतत जुड़ाव

कुलदीप ने अपने सफर के दौरान देश के प्रमुख कृषि अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) का भी दौरा किया है। इनमें –

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर

भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर

रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी

राष्ट्रीय बीज निगम लिमिटेड, भोपाल

राष्ट्रीय खरपतवार निदेशालय, जबलपुर

केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल

कृषि विज्ञान केंद्र दमोह, जबलपुर, भोपाल और नरसिंहपुर शामिल हैं।

इन विज़िट्स से उन्हें नवीनतम कृषि तकनीक और बीज उत्पादन के तरीकों की जानकारी प्राप्त हुई, जिसका लाभ अब क्षेत्रीय किसान भी ले रहे हैं।

किसानों की नई पहचान

आज कुलदीप पटेल का मिर्जापुर गांव आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए एक “मॉडल विलेज” की तरह बन रहा है, जहां रबी और खरीफ सीजन में दूर-दराज़ से किसान उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती के बारे में सीखने पहुंचते हैं।

कुलदीप का मानना है कि “अगर वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जाए तो देश के छोटे किसान भी कम जमीन में अधिक उत्पादन कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं।”

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