मप्र शिक्षक संघ की पहल पर लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किए निर्देश
सी एल गौर रायसेन
प्रदेश के समस्त शासकीय, अशासकीय विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम, अनुशासन, पर्यावरण सौंदर्य, छात्रों के चरित्र निर्माण, सेवा, समर्पण, संस्कार तथा भेदभाव रहित वातावरण निर्माण की दृष्टि से आगामी 1 सितम्बर 2025 सोमवार को ‘हमारा विद्यालय हमारा स्वाभिमान अभियान तहत संकल्प दिलाया जाएगा। मप्र शिक्षक संघ की पहल पर लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके निर्देश जारी किए हैं। सभी स्कूलों में उक्त विचार एवं भाव को लेकर विद्यालय के शिक्षक तथा अध्ययनरत छात्र एक साझा संकल्प का वाचन करेंगे। मप्र शिक्षक संघ द्वारा हमारा विद्यालय हमारा स्वाभिमान अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत शिक्षकों एवं छात्रों को उनके कर्तव्य का बोध कराने हेतु संकल्प दिलाया जा रहा है। 1 सितंबर को यह संकल्प दिलाया जाएगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने बताया कि विद्यालय परिसर की स्वच्छता, अनुशारान तथा प्रेरणास्पद वातावरण बनाते हुए विद्यालय की सम्पदा-संसाधन को राष्ट्रधन मानते हुए इनको संरक्षण कर भेदभाव रहित शिक्षण, आत्म विकास एवं चरित्र निर्माण, सेवा समर्पण के प्रति ध्यान आकृष्ट करने हेतु यह अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालय में संकल्प पत्र का वाचन प्रार्थना के समय अथवा प्रधानाध्यापक, प्राचार्य की सहमति से आधा घंटे (30 मिनट) की अवधि में करेंगे। संचालनालय ने सम्पूर्ण प्रदेश में विद्यार्थी एवं शिक्षक सामूहिक उत्तरदायित्व के बोध से अपने-अपने विद्यालय को श्रेष्ठ एवं उत्तम श्रेणी का विद्यालय निर्मित करने हेतु संकल्पवान हों, इस हेतु समस्त विद्यालय को उपरोक्त संकल्प पत्र के वाचन संबंधी कार्यक्रम हेतु निर्देश जारी किए हैं। संघ के रायसेन जिले के अध्यक्ष गिरीश चंदेल ने बताया कि इस संकल्प को लेने साथ ही इसके पालन के लिए भी कहा गया है। उन्होंने अधिकाधिक संख्या में इस आयोजन में शामिल होने का सभी से आग्रह किया है।
इस प्रकार से दिलाया जाएगा संकल्प,,,,
हम मिलकर अपने विद्यालय को स्वच्छ, अनुशासित, हरित तथा प्रेरणास्पद बनाए रखेंगे।
हम विद्यालय के सम्पदा-संसाधन तथा समय को राष्ट्रधन मानते हुए उनका संरक्षण और विवेक-पूर्वक उपयोग करेंगे।
हम विद्यालय में ऐसा वातावरण बनाएँगे, जहाँ कोई भेदभाव नहीं होगा। हम सभी समभाव से सीखने और सिखाने के पथ पर अग्रसर रहेंगे।
हम शिक्षा को केवल ज्ञान का माध्यम नहीं; अपितु चरित्र-निर्माण, आत्मविकास और समाज-सेवा का साधन मानकर कार्य करेंगे।
हम इस विद्यालय को केवल एक संस्था नहीं; अपितु संस्कार, सेवा और समर्पण का तीर्थ मानते हुए उसका गौरव बढ़ाने हेतु सतत प्रयत्नशील रहेंगे।
हम यह दृढ संकल्प लेते हैं कि हमारा विद्यालय – हमारा तीर्थ है, हमारी आत्मा का अभिमान है और राष्ट्र-निर्माण का आधार है।