मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
गणेश उत्सव की तैयारियां पूरे दीवानगंज सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। इस बार 27 अगस्त से शुरू होने वाले इस पर्व के लिए बाजार गणपति बप्पा की रंग-बिरंगी और इको-फ्रेंडली मूर्तियों से सज गए हैं। मूर्तिकारों ने मिट्टी और गोबर जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनी मूर्तियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है, वहीं भक्तों में सजावट और पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर उत्साह चरम पर है।
मूर्तियों की बिक्री में बढोत्तरी
दीवानगंज भर के बाजारों में गणेश चतुर्थी की तैयारियां अपने चरम पर हैं। दीवानगंज,अंबाडी, सेमरा, बालमपुर सहित कई गांवों में मूर्तियों की बिक्री शुरू हो चुकी है। मिट्टी की मूर्तियों की मांग इस बार प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि ये पर्यावरण के लिए अनुकूल हैं और पानी में आसानी से घुल जाती हैं।
दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा जैसे गांव में इको-फ्रेंडली गणपति की मूर्तियां खास आकर्षण का केंद्र हैं। मिट्टी और गोबर से बनी ये मूर्तियां न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि इनकी कीमत भी बाजार में बिकने वाली पीओपी मूर्तियों से कम है। मिट्टी से बनी मूर्तियां अंबाडी में तैयार की जा रही हैं, जो जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाती हैं।