-यह परंपरा कई वर्ष पुरानी इस मोहल्ले में केवल कांडों की होली जलती है
-इसको मनाता हे आज भी एक विशेष वर्ग
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
विविधता से भरे भारत में होली मनाने की अलग-अलग परंपराएं हैं। कहीं इसे होली तो कहीं होला कहते हैं। वही बरसाना में जहां लठमार होली खेली जाती है। यह होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस दौरान महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष खुद को ढाल से बचाते हैं। यह परंपरा राधा-कृष्ण की लीलाओं से प्रेरित है।

इसी तरह दीवानगंज के एक मोहल्ले में लठमार होली होती है जिसमें महिलाएं पुरुषों को लठ मारकर होली मनाने का चलन कई वर्षों से चला आ रहा है। आज की नई पीढ़ी भी इसको मनाती चली आ रही है। जब गांव के नागरिक जुलूस लेकर उस मोहल्ले में पहुंचते हैं तो उन पर भी महिलाओं द्वारा लठ मारकर स्वागत किया जाता है हालांकि इससे किसी को कोई हानि नहीं पहुंचती है। बल्कि यहां कई साल पुरानी परंपरा है। गुसाई मोहल्ले में कई वर्षों से केवल गोबर से बने कंडे की होली जलाई जाती है इस होली में लकड़ी का बिल्कुल भी उपयोग नहीं होता है। होली के दिन से लेकर रंग पंचमी के दिन तक यहां पर लठमार होली का आयोजन लगातार होता रहता है। मोहल्ले में रहने वाले रंजीत गुसाई और भूरा गुसाई ने बताया कि यह परंपरा हमने अपने जन्म से लेकर आज तक देखते आए हैं हमारे पिताजी भी हमसे यही कहा करते थे कि यह परंपरा उनके पूर्व पूर्वज भी मानते चले आए हैं।

होली भारत का वह खुशहाल त्योहार है जिसे पूरे भारत में लोग अपने अंदाज में मनाते हैं, चाहे वह ब्रज की लठमार होली हो या वृंदावन की फूलों की होली। हर क्षेत्र में होली की अपनी विशेष परंपराएं हैं। होली का त्योहार रंगों और मिठाइयों का त्योहार है और यहां पूरे भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इससे कहीं अधिक होली केवल रंगों का नहीं बल्कि अनोखी परंपराओं और उत्सवों का भी प्रतीक है। जी हां, होली भारत के विभिन्न हिस्सों में अपने विशेष तरीके से मनाई जाती है और साथ ही अलग-अलग नामों से भी मनाई जाती है। यहां श्रद्धा और वीरता का भी अद्भुत संगम देखने को मिलता है।