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आचार्यश्री विद्यासागरजी की समाधि के एक साल पूर्ण होने पर भव्य कवि सम्मेलन आयोजित

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-आचार्यश्री विद्यासागरजी के पावन चरणों से पुनः विकसित हुए बाड़ी ने किया आचार्यश्री को याद
सुरेंद्र जैन बाड़ी रायसेन

दिगंबर जैन परंपरा के महान तपस्वी युग प्रणेता समाधिस्थ परम पूज्य आचार्यश्री 108विद्यासागरजी महामुनिराज की यम सल्लेखना को एक वर्ष पूर्ण होने पर प्राचीन धर्म स्थलों की नगरी बाड़ी ने उन्हें याद किया और जैन समाज ने महा तपस्वी की याद में विनयांजलि स्वरूप भव्य कवि सम्मेलन का बस स्टेंड पर आयोजन किया।


कवि सम्मेलन में ललितपुर से पधारे लोकप्रिय कवि वीरेंद्र जैन विद्रोही ओर उनकी टीम के कवि सौरभ जैन भयंकर चंदेरी गुना श्रुति जैन जबलपुर एवं स्थानीय कवियों में सुरेंद्र जैन बाड़ी वाले रायपुर ने गुरु चरणो में समर्पित अपनी कविताओं के माध्यम से महातपस्वी का गुणगान करते हुए उनकी त्याग तपस्या उनके द्वारा भारत को आत्मनिर्भर समृद्धशाली भारत बनाने तीर्थों की रक्षा नव तीर्थों का निर्माण करने धरा पर साक्षात लक्ष्मी रूपी गौमाता की रक्षार्थ दयोदय महासंघ के माध्यम से देशभर में डेढ़ सौ से अधिक गौशालाओं की स्थापना कराकर लाखों गौवंश की रक्षा करने के उनके प्राणी मात्र की रक्षा के धर्म दया धर्म को कविताओं के माध्यम से बताया गया

आचार्यश्री विद्यासागर जी ने छप्पन साल तक कठिन तपस्या की ओर आत्मकल्याण के पथ पर चलते हुए प्राचीन भारत की ओर वापस चलने का आव्हान करते हुए इंडिया शब्द की अंग्रेजो की गुलामी से मुक्ति दिलाने में अहम भूमिका निभाई राष्ट्रभाषा हिंदी में ही भारत में प्रत्येक कार्य हो इसके लिए सदैव प्रयास किए महातपस्वी आचार्यश्री विद्यासागरजी ने भारत का भ्रष्टाचार मुक्त उज्ज्वल भविष्य बनाने देश के कई राज्यों में प्रतिभा स्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ की स्थापना कर जबलपुर ललितपुर डोंगरगढ़ चंद्रगिरी रामटेक सहित कई जगह बालिकाओं को संस्कार आधारित शिक्षा प्रदान करने प्रतिभा स्थली की स्थापना की जिनमें हिंदी माध्यम में सीबीएसई कोर्स से विद्याध्ययन चल रहा है और विषय के रूप में फर्राटेदार अंग्रेजी वक्त जरूरत काम पड़ने सिखाई जा रही है इन सभी प्रतिभा स्थली में बच्चियों को संस्कार के साथ कम से कम खर्च में ऐसी शिक्षा दी जा रही है कि वह जिस क्षेत्र में भी जाएं आत्मकल्याण के पथ पर चलते हुए अपने भारत को समृद्धशाली भारत बनाए
गौवंश की रक्षार्थ दयोदय गौशाला की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभा स्थली की स्थापना ओर अहिंसक वस्त्रों के साथ ग्रामीणों की आजीविका के लिए चल चरखा हाथ करघा केंद्रों की स्थापना की जबलपुर डोंगरगढ़ चंद्रगिरी सागर बीना बारा खजुराहो कुंडलपुर सहित देशभर में कई जगह आचार्यश्री विद्यासागर चल चरखा हथकरघा केंद्रों की स्थापना की जिनमें ग्रामीण महिलाओं के परिवार जनों को सर्वप्रथम मांस मदिरा का आजीवन त्याग कराया उसके उपरांत उन्हें खादी बनाने का प्रशिक्षण देकर खादी का कपड़ा बनाना सिखाया और उन्हें चल चरखा हथकरघा केंद्रों में रोजगार से जोड़ा जिससे ग्रामीण महिलाएं रोजगार से लगकर अपना अपने परिवार का लालन पालन अच्छे से करते हुए स्वयं के पैरों पर खड़ी होती जा रही  हे।

तीर्थों के उद्धारक थे आचार्यश्री
दिगंबर जैन आचार्य श्री तीर्थों के उद्धारक व नव तीर्थों के निर्माता भी थे उन्होंने सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर नैनगिरी जबलपुर पिसनहारी की मढिया जी अतिशय क्षेत्र बाड़ी सहित देशभर के कई अति प्राचीन क्षेत्रों का जीर्णोद्धार कराया उन्हें समाप्त होने से बचाकर उनकी आयु हजारों साल बढ़ा दी तो वहीं चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में छत्तीसगढ़ का प्रथम जैन तीर्थ का निर्माण भी कराया जहां नव तीर्थ के साथ प्रतिभास्थली गौशाला चल चरखा हथकरघा से प्राचीन समृद्धशाली भारत की झलक देखने को मिलती है।

चरण पड़ते ही बाड़ी तेजी से हुआ विकसित
बाड़ी प्राचीन धर्म स्थलों की महान तपस्वी ऋषि मुनियों की तपोभूमि है एक समय जब प्राचीन बाड़ी कला से ही बरेली भोपाल जबलपुर की ओर जाने आने का मार्ग था तब यहां का स्वर्णिम युग था लेकिन आजादी के बाद जब हाइवे पुरानी बाड़ी को छोड़ नई बाड़ी बनाकर पुरानी बाड़ी से दो किलो मीटर दूर से निकला तो धीरे धीरे प्राचीन धर्म स्थलों की नगरी बाड़ी कला अपनी पहचान खोलने लगी ओर तहसील यहां से बरेली पहुंच गयी प्राचीन धर्मस्थल भी देखरेख के अभाव में पहचान खोते जा रहे थे लेकिन अचानक 1995की अठारह दिसंबर को विशाल संघ के साथ आचार्यश्री विद्यासागर जी का बाड़ी में प्रथम बार मंगल पदार्पण हुआ आचार्यश्री के पावन चरण पड़ते ही प्राचीन धर्म स्थलों की नगरी बाड़ी के भाग्य खुल गए अतिशय क्षेत्र बाड़ी का तो विकास हुआ ही सनातन धर्म के प्रत्येक प्राचीन मंदिरों के भी मानो भाग्य खुल गए उनके पावन चरण पड़ने के बाद बाड़ी पुनः तहसील बन गया बारना नदी पर ऊंचा पुल बन गया बाड़ी की हर गली हर सड़क कांक्रीट की बन गई बड़ा हॉस्पिटल बन गया ओर यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई इतना ही नहीं महातपस्वी कि आहार चर्या अतिशय क्षेत्र के सामने जिस यादव परिवार के घर में लगे चौकों में हुई थी उनके परिवार के भी दिन फिर गए सुरेश यादव बालकिशन ओर उनका पूरा परिवार जो आचार्यश्री के मंगल पदार्पण के पहले बहुत समस्याओं से जूझ रहा था गेहूं की फसल में गेरूआ रोग था परिवार के सदस्य अस्वस्थ थे कृषि जमीन पर चार पानी के लिए चार बोर कराए चारों फेल हो चुके थे उस परिवार के लिए तो मानो साक्षात भगवान उसके घर में पहुंच गए उसके भाग्य खुल गए और ऐसा अतिशय हुआ कि सभी परिजन स्वास्थ्य फेल हो चुके बोर के गड्ढों में पानी आ गया फसल भी शानदार हुई तभी से यह यादव परिवार आचार्यश्री का गुणगान करता रहता है

बाड़ी में लाल पाषाण की चौबीसी का था सपना
आचार्यश्री बाड़ी के अति प्राचीन बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के अतिशय क्षेत्र का समुचित विकास तो अपने आशीर्वाद से करा दिए थे लेकिन इस प्राचीन अतिशय क्षेत्र के चारों तरफ लाल पाषाण की चौबीसी बनवाना चाहते थे और विंध्याचल पर्वत की उस गुफा को भी विकसित कराना था जो पूज्य मुनि सहजानंद जी की तपोभूमि है लेकिन किन्हीं कारणों से आचार्यश्री का यह सपना अभी पूर्ण नहीं हुआ है उनके परम शिष्य निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी का जब भी बाड़ी मंगल पदार्पण हुआ तब गुरुजी का सपना साकार होगा ऐसी उम्मीद है।

कविताओं में विद्या नीति से विश्वगुरु
ललितपुर से पधारे लोकप्रिय कवि आचार्यश्री के परम भक्त वीरेंद्र जैन विद्रोही सौरभ जैन भयंकर चंदेरी ने गुरु भक्ति में शानदार कविता पाठ देर रात तक सैंकड़ो गुरुभक्त श्रोताओं को अपनी भक्तिपूर्ण कविताओं से बांधे रखा ओर कवियों ने कविताओं के माध्यम से विद्या नीति से भारत के विश्वगुरु बनने की बात कही..
स्थानीय कवि सुरेंद्र जैन ने अपनी स्वरचित कविता *डॉलर नीचे रुपया ऊपर हो जाएगा सुन सरकार*
*विद्या नीति विश्व गुरु की,विश्व गुरु सपना साकार* *चल चरखा हथकरघा घर घर,पहुंचा दो मोदी सरकार* के माध्यम से श्रोताओं में जोश भरा
इनकी ओर से हुआ भव्य कवि सम्मेलन
आचार्यश्री को याद करते हुए विनयांजलि में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन सौरभ जैन हार्डवेयर राजू जैन राजीव जैन मोबाइल विपिन जैन कल्लू डंपर वाले यीशु जैन डेकोरेशन राजेंद्र कुमार जैन मोबाइल हर्षित कुमार जैन अंकुर जैन मयूर जैन चंद्रप्रकाश उर्फ भूरा जैन एवं भूरा बजाज पंकज गोयल के विशेष प्रयास ओर सहयोग से हुआ जिसमें समाज के अध्यक्ष नरेंद्र जैन का भी सहयोग रहा।

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