– शिवपुरी में अनोखा मामला सामने आया जिसमें दूल्हे ने टीका में मिलने वाली दहेज की राशि को लौटा दिया
– शिवपुरी में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर ने टीका में मिलने वाली 5 लाख 51 हजार रुपए की राशि लेने से किया इनकार
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
शिवपुरी में एक इनकम टैक्स इंस्पेक्टर और उनके परिवारजनों द्वारा दहेज प्रथा के खिलाफ जनजागृति का संदेश देने का एक मामला सामने आया है। इस मामले में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर और उनके पिता द्वारा टीका (फलदान) में मिलने वाली 5 लाख 51 हजार रुपए की राशि लड़की पक्ष लेने से इंकार कर दिया। दिल्ली में पदस्थ इनकम टैक्स इंस्पेक्टर इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह धाकड़ का फलदान समारोह था लेकिन फलदान समारोह में जिस लड़की से संबंध हो रहा था उसके परिवारजनों द्वारा टीका में 5 लाख 51 हजार रुपए की राशि देने का की इच्छा जाहिर की लेकिन इनकम टैक्स इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह धाकड़ ने इस राशि को लेने से इनकार कर दिया। इसके अलावा युवक वीरेंद्र के पिता ने इस मौके पर कहा कि यह राशि नहीं चाहिए। बेटी आप दे रहे हैं उसे बड़ी और क्या चीज चाहिए। इनकम टैक्स इंस्पेक्टर और उनके पिता द्वारा जब यह बात समारोह में कही तो वहां पर लोगों ने इसकी खूब प्रशंसा की और तालियां बजाकर इस प्रस्ताव का स्वागत किया।
5लाख 51 हजार रुपए की राशि लौटाई-
शिवपुरी के सिया मैरिज गार्डन में ग्राम ठेह निवासी वीरेंद्र सिंह धाकड़ के छोटे बेटे रविंद्र धाकड़ की शादी थी। चूंकि वीरेंद्र दिल्ली में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर है, इसलिए परिवार वाले टीके में पांच लाख 51 हजार रुपये लेकर आए थे। टीके की रस्म अदा होने के बाद वीरेंद्र ने जब टीके की थाली वापिस की तो लोगों को लगा कि कुछ गलत तो नहीं हो गया। हालांकि बाद में वीरेंद्र धाकड़ ने बताया कि वह दहेज प्रथा के खिलाफ हैं। एक पिता अपनी बेटी हमेशा-हमेशा के लिए हमें दे रहा है, इससे अधिक एक लड़के वाले को और क्या दे सकता है। लोगों का कहना है कि वीरेंद्र धाकड़ ने अपने बड़े बेटे की शादी में भी दहेज नहीं लिया था। अंत में सगुन के तौर पर सिर्फ एक नारियल और एक रुपये टीके में लिया गया।
करैरा में भी 40 लाख रुपए का ऑफर ठुकराया था-
शिवपुरी जिले के करैरा में भी एक ऐसा मामला सामने आ चुका है जब लोधी समाज के एक शिक्षक अमर सिंह लोधीद्वारा इसी तरह से दहेज प्रथा के खिलाफ खड़ा होकर समाज में बदलाव लाए जाने की बात कही थी। करैरा में शिक्षक अमर सिंह लोधी ने अपने बेटे की सगाई के दौरान 40 लाख रुपए की राशि लेने से इंकार कर दिया गया था। इस समारोह में शिक्षक ने नेक के रूप में मात्र 501 रुपए लिए थे।