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स्कूल जाने की उम्र में बच्चे थैला लेकर पन्नी बीन रहे भी कर रहे बाल मजदूरी

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ग्रामीण अंचल में छोटे-छोटे बच्चे पन्नी बिनते हुए आते हैं नजर, जबकि सरकार इन कर रही है करोडो रुपए खर्च

मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया का नारा उस तस्वीर के आगे फीका पड़ता दिखाई देता है, जिसमें स्कूल जाने की उम्र में बच्चे थैला लेकर पन्नी बीनने और बाल मजदूरी करते दिखाई देते हैं। अब इसे हमारे सिस्टम की उदासीनता कहें या बाल संरक्षण के प्रति लापरवाही। आज भी शिक्षा के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं बनती हैं, मगर जमीनी स्तर पर आकर दम तोड़ देती हैं।
बेरखेड़ी चौराहा , फैक्ट्री चौराहा, दीवानगंज,और दीवानगंज सहित क्षेत्र में घुमक्कड़ जाति वर्ग के लोग रहते हैं। सुबह जिस समय दूसरे घरों के बच्चे स्कूल के लिए हाथ में बस्ता लेकर निकलते हैं। दीवानगंज मोहल्ले के बच्चे हाथ में थैला लेकर कचरा बीनने, या बाल मजदूरी करने जाते हैं। दीवानगंज मैं घुमक्कड़ समाज के कई बच्चे शिक्षा से वंचित है। कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय बाल एवं संरक्षण अधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित डोला घाट हनुमान मंदिर कुलहडिया पर कैंप लगाकर कई बच्चों के परिजनों से भेंट कर तथा बच्चों को मिल रही सुविधाओं का जायजा भी लिया था।
कानूनगो ने अधिकारियों से भोपा समाज और अनाथ बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कहा था। उन्हें मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा था। उनके बच्चों को स्कूल में दाखिल कराने के निर्देश दिए थे। छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ देने के लिए इनकी जाति का निर्धारण करने के लिए जरूरी कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे। क्षेत्र में रह रहे सेहरिया, बछड़ा, सपेरा, गुसाई सहित आदिवासी समाज के लोगों को भी शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने के संबंध में निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भी हालत पहले ही जैसे नजर आ रहे हैं।
दीवानगंज और बेरखेड़ी चौराहा पर ऐसे बच्चे आसानी के साथ मिले जाएंगे, जो कचरा बीनने का कार्य करते हैं। इन सभी बच्चों का स्ट्रीट चिल्ड्रन के अंतर्गत सर्वे कराया जाना चाहिए। कुछ समय चाइल्ड लाइन ने भी सर्वे किया था। मगर स्थिति वैसी की वैसी ही है। शासन इन बच्चों को स्कूल भेजने सहित परिजनों को अन्य कार्यों में लगाए। अभी भी कुछ ऐसे बच्चे हैं जो क्षेत्र में पन्नी बिनते नजर आ रहे हैं। ज्यादातर बच्चे दीवानगंज क्षेत्र में दिखाई देते हैं।

शासन प्रशासन की तरफ से कचरा बीनने वाले बच्चों, अनाथ बच्चों जिनके माता-पिता इस दुनिया में नहीं है ऐसे बच्चों के लिए सरकार कई योजना लेकर आई है। जिससे बाल मजदूरी के साथ ही पन्नी, कबाड़ा ना बिनना न पड़ेे। दीवानगंज क्षेत्र में ऐसे कई बच्चे रोज घूमते दिखाई देते हैं। हालांकि कुछ दिन पहले ही यहां पर कैंप लगाया गया था जिसमे कई बच्चों को सरकार की चल रही योजना का लाभ दिया जा रहा है।
गिरजेश नायक दीवानगंज सरपंच

ऐसे परिवारों के लिए शिक्षा के प्रति जागरुक करना आवश्यक है। इनको विस्तार पूर्वक समझाना पड़ेगा कि बच्चों को पढ़ाना कितना आवश्यक है, यहां के बच्चे सुबह 6 बजे से ही फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज के आसपास पन्नी बिनते हुए नजर आते हैं उनकी शिक्षा के विषय में कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है जिससे बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है सरकार कई तरह से प्रयास कर रही है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहें मगर इसके बावजूद भी घर के बड़े बुजुर्ग अपने बच्चों की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। छोटे छोटे बच्चों को सुबह से ही पन्नी बिनने भेज देते हैं।
अनिल साहू, सुरेश साहू, राकेश कुशवाह, मुकेश कुमार दीवानगंज निवासी

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