देवेन्द्र तिवारी सांची,रायसेन
ग्राम पंचायतों मे पंचायत सचिवों को ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी जिससे ग्राम पंचायतों के माध्यम से पंचायतों मे लागू होने वाली जनकल्याण कारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन हो सके ।परन्तु इन सचिवों पर भार तब बढ जाता है जब अन्य विभागों की योजनाओं को भी इनके मत्थे मढ दिया जाता है जिससे ग्राम पंचायतों के कार्य प्रभावित हो जाते है।
जानकारी के अनुसार सांची जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली 83 पंचायतों में सचिवों को पदस्थापना की गई है इन सचिवों पर कार्य का भार अधिक होने से रोजगार सहायक नियुक्त किए गए हैं ।इन पंचायतों में केन्द्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पंचायतों के माध्यम से जमीनी स्तर तक पहुंचाया जा सके ।तथा ग्रामीण सरकारों की योजना से लाभान्वित हो सके ।बताया जाता है इन योजनाओं के जमीनी स्तर पर उतरने के पहले ही विभिन्न सरकारी विभागों मे सरकार की योजनाओ का भार भी इन पंचायत सचिवों के जिम्मे सौंप दिया जाता है इनमें शामिल लाडली लक्ष्मी योजना एवं किसानों को लाभान्वित करने वाली कृषि विभाग से सम्बंधित योजना तथा विभिन्न सर्वे सहित अनेक ऐसी योजना है जिनकी जिम्मेदारी इन सचिवों को सौपी जाती हैं जिससे पंचायतों में होने वाले विकास तो थम ही जाते साथ ही ग्रामीणों की समस्या भी हल नही हो पाती जिससे ग्रामीण भटकते दिखाई दे जाते हैं तब मजबूर होकर इन सचिवों की शिकवा शिकायत शुरू हो जाती है बताया तो यहां तक जाता है कि पंचायतों मे अनेक पंचायत ऐसी है जिनमें सचिव न होने से या तो रोजगार सहायक ही सचिवों का प्रभार सम्हाल रहे हैं तथा दो दो पंचायतों की जिम्मेदारी सचिवों के मत्थे मढ दी गई हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों मे विकास तो प्रभावित होते ही है साथ ही सरकार की जनकल्याण कारी योजना भी अधर मे झूलने लगती है इतना ही नहीं समय समय पर इन सचिवों की विभिन्न योजनाओं को लेकर जिला मुख्यालय अथवा जनपद पंचायत मुख्यालय पर बैठकें आयोजित होती रहती हैं जिनमें सचिवों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने मजबूर होना पडता हैं इन ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या से जप अधिकारी तो बेखबर रहते ही है साथ ही जिले में बैठे अधिकारी भी बेखबर बने रहते है ।तब ग्राम पंचायतों में सरकारी जनकल्याण कारी योजनाओं का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जमीनी स्तर पर कितनी उतर पाती हैं ।नाम न बताने की शर्त पर सचिव बताते है कि पंचायत क्षेत्रों में आने वाली जनकल्याण कारी योजना के क्रियान्वयन करने का प्रयास करते है परन्तु अन्य विभागों से संबंधित योजना भी हमें सौंप दी जाती हैं इसके साथ ही पंचायत क्षेत्रों में विकास भी कराना पडते हैं तथा ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं का हल भी करना पडता है जब विभिन्न योजनाओं में व्यस्त रहते हैं तब ग्रामीणों की समस्या हल न होने पर शिकवा शिकायत होती हैं इन शिकायतों मे भी हमें अधिकारियों की खरीखोटी सुनने मजबूर होना पडता है तब अधिकारी भी हमारी व्यस्तता से बेखबर बने रहते है ।जबकि केन्द्र एवं राज्य सरकार के दल भी समय समय पर निरीक्षण करने आते है तब उन्हें भी पंचायत क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने मजबूर होना पडता है ।इस स्थिति में हम अपने परिवार को भी समय नहीं दे पाते है ।