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सांची विश्वविद्यालय में सत्रारम्भ, नये छात्रों को कुलगुरु ने दिया गुरुमंत्र

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हर छात्र को भारतीय शिक्षा पद्धति पर गर्व होना चाहिए- प्रो. लाभ
भोपाल सोशल साइंस कॉलेज के छात्र सांची विवि पहुंचे
• बीएसएस छात्रों ने सीखा अंतर्मौन योग व मेडिटेशन
• “भारतीय शिक्षा सदैव समाधान परक रही है”

सांची विश्वविद्यालय में छात्रों का स्वागत दीक्षारंभ से

रायसेन।  सांची विश्वविद्यालय में अकादमिक सत्र 2024-25 के लिए दीक्षारंभ कार्यक्रम में कुलगुरु और शिक्षकों ने छात्रों का स्वागत किया। नये छात्रों को गुरुमंत्र देते हुए कुलगुरु प्रो वैद्यनाथ लाभ ने किताबों से दोस्ती करने और गुरु के पास बैठकर ज्ञान प्राप्ति का महत्व समझाया।

उन्होने कहा कि गुरु को कभी भी ज्ञान बांटने में संकोच नहीं होता। कुलसचिव प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि पूरे विश्व को विश्वविद्यालय की अवधारणा भारत ने दी है।
सांची विश्वविद्यालय में भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस के 50 छात्रों का एक दल भी भ्रमण के लिए पहुंचा। विश्वविद्यालय के योग विभाग की टीम ने सभी छात्र-छात्राओं को एकाग्रता बढ़ाने के लिए 15 मिनट का ‘अंतर्मौन’ सिखाया जिससे छात्र पढ़ाई के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में पूरा फोकस स्थापित कर कार्य कर सकें।


सांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लाभ ने छात्रों को कहा कि उन्हें भारतीय संस्कृति और भारतीय शिक्षा पद्धति पर गर्व करना चाहिए। प्रो. लाभ ने कहा कि भारत की गिनती, 1834 में अंग्रेज़ों द्वारा मैकाले की शिक्षा पद्धति थोपे जाने से पहले विश्व के सर्वाधिक शिक्षित देशों में होती थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ों को शासन करने के लिए क्लर्कों की ज़रूरत थी इसलिए उन्होंने भारतीय शिक्षा पद्धति को बदल कर रख दिया। प्रो. लाभ ने छात्र-छात्राओं को नई शिक्षा नीति 2020 के लाभों से परिचित कराया।


भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेस की हिंदी विभाग की डॉ. सुरभि नामदेव ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार दर्शन और आध्यात्म हैं। बी.एस.एस कॉलेज की फिलॉसफी विभाग की डॉ. संगीत महाशब्दे ने छात्रों से कहा कि उन्हें पढ़ाई-लिखाई के अलावा घूमना चाहिए क्योंकि घूमने अर्थात यायावरी से बहुत कुछ सीखने मिलता है। उन्होंने लेखक-साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन की यायावरी का भी उल्लेख किया।


सांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने भारतीय परंपरा का उल्लेख कर छात्रों को वसुधैव कुटुम्बकम तथा सर्वे भवंतु सुखिन: के विचार के बारे में परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा सदैव से समाधान परक रही है इसलिए हम भारतीय, समाधान परक व्यवस्था में रहने वाले लोग हैं। प्रो. चतुर्वेदी ने छात्रों को अपने व्यक्तित्व के निर्माण के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तित्व ही उसका परिचय होता है।


विश्वविद्यालय के डीन व अंग्रेज़ी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन मेहता ने बीएसएस कॉलेज के छात्रों को सांची विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों से अवगत कराया। योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र बाबू खत्री ने छात्रों को मेडिटेशन व योग के विषय में जानकारियां दीं।

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