ग्वालियर: नगर निगम की लैंडफिल साइट पर कचरा निष्पादन के नाम पर जनता से वसूले गए टैक्स के करीब पांच करोड़ रुपयों से अधिक में खरीदी गई मशीनें बंद पड़ी है। हर माह पांच से सात लाख रुपये कर्मचारियों की वेतन भत्ते पर खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी कचरा निष्पादन नहीं हो पा रहा है। हालात यह हैं कि केदारपुर स्थित नगर निगम की लैंडफिल साइट के दायरे से कचरा बाहर निकल चुका है। लैंडफिल साइट के अंदर कचरा डंप करने के लिए जगह नहीं रही। इस कारण से बाउंड्रीवाल के बाहर कचरा फेंका जा रहा है और निष्पादन के नाम पर आग के हवाले कर दिया जाता। इसके कारण पूरे क्षेत्र में धुआं का गुबार बना हुआ है और वातावरण में वायु प्रदूषण फैल रहा है, जिससे लोग परेशान हैं।
50 बीघा में लैंडफिल साइड, 200 मीटर बाहर तक पहुंचा कचरा
लैंडफिल साइट करीब पचास बीद्या में बनी हुई है। जहां पर 15 वर्ष पुराना कचरा डंप है। नगर निगम के प्लांट बंद है और कंपनी द्वारा लगाई गई ट्रामल मशीन की मदद से ही कचरे का निष्पादन हो रहा है पर कम मात्रा में। इधर हर दिन कचरा बढ़ रहा है। जिसके कारण लैंडफिल साइट के बाहर करीब 200 मीटर आगे सड़क किनारे की कचरे डंप किया जा रहा है। जहां कचरे के पहाड़ बनने लगे हैं।
10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा है कचरा
राज्य सरकार द्वारा तय की गई एजेंसी से एक साल पहले सर्वे कराया गया, तब लैंडफिल साइट पर कचरे की मात्रा साढ़े सात लाख मीट्रिक टन बताई गई थी। इसके बाद साढ़े तीन लााख मीट्रिक टन कचरा और बढ़ गया था। इस हिसाब से वर्षों पुराना कचरा करीब 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक लैंडफिल साइट पर था। तब से हर दिन 500 टन कचरा पहुंच रहा है।
प्लांट बंद
लैंडफिल साइट पर कचरा का निपटारा करने के लिए चार प्लांट लगाए गए हैं, जो प्रतिदिन शहर से निकलने वाले कचरा का सेग्रीगेट कर उसका खाद व निष्क्रीय अपशिष्ट तैयार करे, लेकिन जो प्रतिदिन कचरा शहर से निकलता है उसे लैंडफिल साइट के बाहर डंप किया जा रहा है। परिसर के अंदर वर्षों पुराना कचरा डंप है जिसके कारण नया कचरे के लिए स्थान ही नहीं है।
कचरे में लगी आग, फायर ब्रिगेड कागजों में चलती है
लैंडफिल साइट के अंदर और बाहर कचरे के पहाड़ बन चुके हैं। कचरे जो यह पहाड़ है उनमें आग लगी हुई थी। आग के कारण आसमान में धुएं का गुबार छाया हुआ था। कचरा जलने से बदबू फैल रही है। कचरे में लगी आग पर काबू पाने के लिए नगर निगम द्वारा फायर ब्रिगेड की उपलब्धता है, लेकिन इसका उपयोग कचरा में लगी आग को बुझाने में नहीं किया जा रहा था और न ही वहां पर फायर ब्रिगेड की कोई गाड़ी उपलब्ध थी। नाम न छापने की शर्त पर निगम कर्मचारी का कहना था कि फायर ब्रिगेड केवल कागजों में चलती है।
हर दिन पहुंच रहा 500 टन कचरा
लैंडफिल साइट पर वर्तमान में शहर के 10 कचरा ट्रांसफर स्टेशनों से हर दिन 500 टन कचरा पहुंच रहा है। साइट पर सुबह से लेकर शाम पांच बजे तक कचरे से भरे ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर पहुंचते हैं। चूंकि लैंडफिल साइट पर पहले से ही कचरे के ढेर लगे हैं, ऐसे में रोज टनों कचरा पहुंचने से ढेरों में इजाफा ही होता जा रहा है। कंपनी को सिर्फ पुराने कचरे का निष्पादन करना है, ऐसे में वह सिर्फ पुराने ढेर ही खत्म करेगी। निगम के खुद के प्लांट लंबे समय से बंद पड़े रहने के कारण अब कबाड़ में तब्दील होते नजर आ रहे हैं।