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डॉ. अंबेडकर जयंती के साथ समरसता दिवस, सांची विश्वविद्यालय में हुआ विशेष आयोजन

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•‘महावीर, बुद्ध और डॉ. अंबेडकर एक विचार हैं’
• ‘चरित्र जिसका बड़ा है वो बलशाली है’
• ‘भारत का समाज मिटता नहीं है’
• ‘भारत ने सदैव से ही समरसता का परिचय दिया है’

साँची/रायसेन। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में आज अंबेडकर जयंती, महावीर जयंती, पूर्वोत्तर तथा उड़ीसा के नववर्ष तथा मेष सूर्य संक्रांति के माध्यम से समरसता पर्व को मनाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता और कुलसचिव प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने मंच से अपने अपने वक्तव में कहा कि – ‘भारत एक ऐसा समाज है जहां सब मिलकर चलते हैं‘…..कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता ने कहा कि भारत की विभिन्नता में ही एकता है। उनका कहना था कि भगवान महावीर, भगवान बुद्ध और डॉ. भीमराव अंबेडकर एक विचार हैं।


डॉ नीरजा गुप्ता का कहना था कि भारत की विभिन्नता के कारण ही हमारी सभ्यता Survival of the fittest है……हम फिट इसलिए हैं क्योंकि ‘चरित्र जिसका बड़ा है वो बलशाली है’…..यही वजह है कि रावण जलता है और राम पूजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता आज पूरे विश्व में देखी-परखी जा रही है……भारत का समाज मिटता नहीं है और सृजन ही हमारी शक्ति है।
कुलपति डॉ. गुप्ता ने कहा कि पश्चिम का बाज़ारवाद हमारे भारतीय समाज को विघटित करने की साज़िश कर रहा है ताकि हमारी संयुक्त परिवार पद्धति समाप्त हो जाए और अलग-अलग होने पर हर घर में अलग-अलग टीवी, गाड़ियां और भौतिकवाद के साधन बेचे जा सकें। उनका कहना था कि ‘भारत धार्मिक उन्माद का जवाब नहीं देता है’।


सांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने कहा कि भारत ने सदैव से ही समरसता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि रामायण के रचियता वाल्मीकी जी और महाभारत के रचियता वेद व्यास जी दोनों ही दलित समाज से थे……और दोनों ही महापुरुषों के लिखे ग्रंथ आज भारत में पूजे जाते हैं। उन्होंने रामायण में राम के शबरी के झूठे बेर खाना, निषादराज को गले लगाना, राक्षस रावण की रक्ष अर्थात जमा करने की प्रवृत्ति का वर्णन किया।


प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने डॉ. अंबेडकर के जीवन काल की घटनाओं का गहनता के साथ वर्णन किया। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के तीनों गुरुओं कृष्णा अंबेडकर, दादा कनिष्कर, शायाजी राव गायकवाड़ और कोल्हापुर के साहूजी महाराज का ज़िक्र किया जिन्होंने बाबा साहब को पढ़ने में अपना संपूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं से आग्रह किया कि वो डॉ. अंबेडकर की लिखी किताबों का गहन अध्ययन करें ताकि भारत में समरसता बनी रहे।
डॉ. अंबेडकर जयंती और समरसता दिवस पर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। बौद्ध दर्शन विभाग के डॉ. रमेश रोहित तथा डॉ. संतोष प्रियदर्शी ने भी डॉ. अंबेडकर पर अपने विचार लोगों के सामने पेश किए। डॉ. प्रियदर्शी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का योगदान भारत के सभी वर्गों के लिए था।

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