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बाढ़ के पानी से हर तरफ बर्बादी का मंजर,कौड़ी बेतवा नदी ने दो दिन ऐसा रौद्र रूप दिखाया

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सब कुछ बर्बाद सब स्टेशन में पानी भरने से बिजली सप्लाई ठप

शिवलाल यादव रायसेन

रायसेन।बाढ़ के पानी भर जाने से हर तरफ बर्बादी का मंजर नजर आया।बाढ़ से भरे पानी से कस्बा सांचेत सर्किल के ग्रामीण अंचल में कच्चे घर धराशायी हुए हैं।बेतवा कौड़ी और रीछन नदी, परासरी नदी सांचेत का जल स्तर कम हुआ ।लेकिन गांव में अभी भी चारों ओर पानी।कमोवेश यही हालात बेतवा कौड़ी रीछन नदी तटों के गांवों में बने हुए हैं।

बाढ़ के पानी से घरों के अलावा ट्रांसफॉर्मर तक डूब गए। एक दिन बाद भी कई जगह इतना पानी भरा है जो ट्रांसफॉर्मर को छू रहा है। ऐसी स्थिति में बिजली कंपनी ने सुरक्षा की दृष्टि से बिजली सप्लाई बंद कर रखी है। लोगों के मोबाइल डिस्चार्ज हो गए। वे फोन लगाकर किसी से मदद तक नहीं मांग पा रहे हैं। क्षेत्र में तीन दिनों से बिजली सप्लाई ठप है।
पानी को देखा तो घर छोड़कर भागे, मवेशियों का पता नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं था कि बेतवा नदी का पानी यहां तक इतना ज्यादा आ जाएगा। सोमवार की रात उन्होंने देखा कि धीरे-धीरे पानी बढ़ता ही जा रहा है और यह देखते ही देखते घराें तक आ गया। उन्हें समझ नहीं आया कि वह खुद को बचाएं या फिर सामान को। आनन फानन में घरों को छोड़कर भागने लगे। इतने में पानी ने पूरे घरों को अपनी चपेट में ले लिया। घर में रखे अनाज और गृहस्थी का सामान सब कुछ पानी में बर्बाद हो गया। मवेशियों का अब तक पता नहीं चल सका है।ट्रांसफॉर्मर तक पानी में डूबे, तीन चार दिन से बिजली गुल है।रायसेन में बिजली सप्लाई सब स्टेशन बाढ़ के पानी में डूबने से 19 घण्टों तक बिजली गुल करना पड़ी थी।

रायसेन जिले के कस्बा सांचेत की परासरी और बेतवा कौड़ी नदी ने ऐसा कोहराम मचाया। अब इन गांवों में तबाही का मंजर ही देखने को मिल रहा है।

बुधवार गुरुवार को MPTODAY टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अलग-अलग गांव में पहुंची। इस दौरान गांव में घरों की हालत देख रुह कांप गई। कुछ गांव ऐसे भी मिले जहां अभी भी घरों के आसपास पानी भरा हुआ था। कच्चे मकान गिर चुके थे। दबकर गृहस्थी का सामान नष्ट हो चुका था। ऐसे में परिवार चाहकर भी वहां नहीं जा सकता था। इसलिए ऐसे परिवार दूसरे गांव में अपने रिश्तेदार या फिर किराए के मकान मेें रहने को मजबूर हैं। कुछ परिवारों को प्रशासन ने स्कूल और छात्रावास में आश्रय दिलाया है। जब तक कि उन्हें रहने के लिए कहीं दूसरी जगह व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक उन्हें यहीं रहना पड़ेगा।

बेतवा कौड़ी और रीछन नदी के उफान से करीब एक दर्जन गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि इन गांवों में रहने वाले एक हजार से अधिक लोगाें को बाढ़ से घिरने के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा चुक है। 200 से अधिक नागरिक ऐसे हैं जिन्होंने बाढ़ में फंसने के बावजूद अपना घर नहीं छोड़ा है। बुधवार को बारिश न होने की वजह से हालात सामान्य होते दिखे। बेतवा कौड़ी रीछन नदी का जलस्तर भी कम हुआ है।

वापस लौटे तो घर में कुछ नहीं था….
सांचेत ,बीदपुरा सिंहपुर इमलिया सीहोरा के ग्रामीणों ने बताया कि आज जब हालात सामान्य होते देखे तो वे वापस अपने घर लौटे। लेकिन यहां आकर देखा तो घर में कुछ भी नहीं बचा है। न तो खाना बनाने गैस चूल्हा है और न ही गेहूं, आटा या अन्य सामग्री। ऐसे में ग्रामीणों से मदद लेकर परिवार का गुजारा कर रहे हैं। उन्हें अब जिला प्रशासन से मदद की आस है ।क्योंकि इस बाढ़ में उनका सब कुछ बर्बाद हो गया है। यहां तक कि बच्चों की किताबें तक पूरी तरह से गलकर नष्ट हो गईं।

100 गांवों में पानी, फसल पूरी तरह बर्बाद….
बेतवा कौड़ी रीछन नदी का पानी लगभग 100 से से ज्यादा ग्रामों में घुस गया। कई कच्चे मकान धराशायी हो गए। ग्रामीणजनाें का फसलों सहित घर गृहस्थी का सामान भी नष्ट हो गया। ग्राम बीदपुरा निवासी पूर्व जनपद सदस्य हरनाम सिंह जाट ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम में पानी घुसने से ग्रामीण जनों का सभी कुछ बर्बाद हो गया है। ग्राम के मेहताब सिंह मीणा का पूरा मकान ध्वस्त हो गया एवं रखे हुए घर गृहस्थी के सामान भी सभी नष्ट हो गए। राम कृपाल सिंह, निरंजन सिंह, कदम सिंह रमेश जाट के मकान सहित सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। रमेश अहिरवार का घर एवं गृहस्थी का सामान पूरी तरह से नष्ट हो गया। ग्रामीणों को सामान निकालने का अवसर भी नहीं मिल पाया। यह परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। आज की स्थिति में भोजन पानी की समस्या इन के सामने खड़ी हुई है।

सोयाबीन गलकर खराब
बेतवा रीछन कौड़ी परासरी नदी सांचेत के उफान से आई बाढ़ ने न केवल इंसान बल्कि जानवर और फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। लगातार बारिश के बाद बाढ़ का पानी खेतों में भरने से सब्जी व सोयाबीन धान के पौधे गलकर खराब हो चुके हैं। क्षेत्र में फसलों को कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन राजस्व विभाग के सर्वे के बाद ही सामने आ सकेगा। हालांकि किसान बडे़ पैमाने पर हानि बता रहे हैं।सुबह तक गांव में कोई भी अधिकारी कर्मचारी नहीं आए। गांव में 25 से 30 परिवारों को भारी नुकसान हुआ है। घर मकान भी गिर गए। सांचेत ग्रामीण ने बताया कि प्रशासन जल्द गांव में पीने के पानी की व्यवस्था करे।, क्याेंकि यहां सिर्फ एकदो हैंडपंप चालू है। ग्रामीणजनों ने बताया कि मकान गिर गए हैं। साथ ही फसल तो पूरे गांव की चौपट हो गईं हैं।

 तीन दिन बारिश से राहत…
पिछले दो तीन दिन इंद्र देवता ने अपना रौद्र ऐसा दिखाया कि हर तरफ त्राही-त्राही मचने लगी। लेकिन इसके बाद मंगलवार और बुधवार गुरुवार न को मौसम की मेहरबानी रही। सुबह से ही मौसम साफ रहा। दिन में काफी अच्छी धूप खिली ।

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