सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
सकल दिगंबर जैन समाज गैरतगंज नगर के वरिष्ठ, सरल एवं समर्पित व्यक्तित्व स्वर्गीय टेकचंद जैन का जीवन संघर्ष, संस्कार, सेवा और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी गाथा रहा। रविवार को आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जिले भर से बड़ी संख्या में सामाजिक लोग, समाजजन एवं शुभचिंतक शामिल हुए। सभी ने शोकाकुल परिवार को सांत्वना देते हुए स्वर्गीय टेकचंद जैन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रति उनके दीर्घकालीन योगदान, सरल व्यवहार, सेवा भावना और सामाजिक सक्रियता को याद करते हुए सकल दिगंबर जैन समाज गैरतगंज द्वारा उन्हें “समाज रत्न” की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके सामाजिक जीवन और समाजहित में किए गए कार्यों को याद कर उपस्थित लोगों ने कहा कि उनका जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
श्री टेकचंद जैन का जन्म 4 जून 1951 को हुआ था। उनके पिता श्री रोशनलाल जी तथा माता श्रीमती दशोदा बाई थीं। बाल्यावस्था में ही पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद माता ने कठिन परिस्थितियों में दोनों बच्चों का पालन-पोषण किया। बचपन में प्यार से उन्हें “टिकुआ” कहा जाता था। आर्थिक परिस्थितियां कठिन होने के बावजूद माता ने दोनों भाइयों को शिक्षा दिलाई।

टेकचंद जी ने छोटी उम्र से ही संघर्ष देखा और परिवार का सहारा बनने के लिए मेहनत-मजदूरी तक की। पत्ती तोड़ने जैसे कठिन कार्य कर उन्होंने परिवार की मदद की। समय के साथ मेहनत, ईमानदारी और लगन से उन्होंने गैरतगंज के अंदर बाजार में अपना घर बनाया और बाद में किराने की दुकान से व्यवसायिक जीवन की शुरुआत की।
धीरे-धीरे उनका जुड़ाव सामाजिक गतिविधियों से बढ़ता गया। वे समाज के सुख-दुःख में सदैव सहभागी रहे और जरूरतमंदों की मदद तथा सामाजिक कार्यों में योगदान देते रहे। सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण वे समाज के हर वर्ग में सम्मान और स्नेह प्राप्त करते थे।
उनके सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें “समाज रत्न” की उपाधि प्रदान किया जाना उनके जीवनभर की सेवा का सम्मान है। परम पूज्य 108 महासागर जी महाराज के आशीर्वचन एवं सान्निध्य में प्राप्त यह सम्मान उनकी सामाजिक यात्रा की महत्वपूर्ण स्मृति बन गया।
8 सितंबर 2026 को 75 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। रविवार के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जिले भर से पहुंचे सामाजिकजनों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने कहा कि टेकचंद जैन भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संघर्ष, संस्कार, सरलता और समाज सेवा की प्रेरणा सदैव समाज के बीच जीवित रहेगी।