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रायसेन में अवैध ईंट भट्टे से बंधुआ मजदूरी से तीन परिवार को कराया मुक्त

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-नाबालिक परीक्षा में शामिल होने से रोका, कलेक्टर से शिकायत,प्रशासन की टीम ने की छापे मार करवाई

रायसेन। तहसील के अंतर्गत करीब 200 से ज्यादा अवैध ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। इन भट्टों पर मजदूर कर्ज के बोझ तेल दबे है। सैकड़ो बाल मजदूरों से भी काम कराया जा रहा है। इन्हीं में से भोपाल रोड स्थित नीमखेड़ा के ग्राम केवटी में संचालित अवैध ईंट भट्टे पर काम करने वाले नाबालिक ने कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा से लिखित शिकायत की इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और राजस्व सहित पुलिस,स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों की टीम ने शुक्रवार को अवैध ईंट भट्टे पर पहुंचकर छापेमार कार्रवाई की इस दौरान यहां 12 परिवारों में करीब 40 से 50 परिवार काम करते मिले जो सभी कर्ज में दबे थे। प्रशासन की टीम ने सभी मजदूरों से पूछताछ कर उनके दस्तावेजों की जांच की यह कार्रवाई देर रात तक जारी रही इसके बाद शिकायतकर्ता नाबालिक सहित तीन परिवारों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया।

नाबालिक बोला पेपर से वंचित रखा

शिकायतकर्ता नाबालिक ने बताया कि ईद भट्टा संचालक विजय कुमार गुप्ता के द्वारा उसे कल 8वीं कक्षा के पेपर में शामिल होने नहीं दिया गया। जब उसने पेपर के लिए स्कूल जाना का बोला तो उसके साथ अभद्रता की गई। नाबालिक ने बताया कि उसके बड़े भाई की शादी के लिए 70000 का कर्ज लिया था परिवार चुका नहीं पाया जो कर्ज बढ़कर एक लाख हो गया। जब दूसरी जगह काम करने जाने लगे तो ईद भट्ठा संचालक ने नहीं जाने दिया और जबरदस्ती उसके भट्टे पर ही काम करने का बोला गया इसके बाद उसने कलेक्ट पहुंचकर कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा को एक लिखित शिकायत की थी। इसके अलावा कार्रवाई के दौरान भी भट्ठा संचालक मजदूरों को डराता धमकता रहा उसे कई बार टीम ने रोका भी पर वह नहीं माना बाद में उसे पुलिस की गाड़ी में बिठाया गया।

8 बाई 8 की झोपड़ी में पांच सदस्य यहां ठीक से खड़े होने तक की जगह नहीं

भट्टे पर बनी 8×8 और 4 फीट की झोपड़ी में ईट बनाने वाले परिवार निवास करते हैं इन झोपड़ी में ठीक से खड़े तक नहीं हो सकते जबकि परिवार के पांच सदस्य इसी झोपड़ी में गुजर बसर करते हैं चूल्हे पर खाना बनाना यहां बच्चों की स्थिति सबसे ज्यादा देनीय मिली कई लोग बीमार भी पाए गए जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा दवाई दी गई।

12 परिवार में 35 से 40 लोग, सब कर्जदार

मौके पर 12 परिवार मिले। महिला और बच्चों सहित 35 से 40 लोग वहीं रह रहे थे। लगभग हर परिवार पर 10 हजार से डेढ़ लाख तक का कर्ज है। मजदूरों ने बताया कि साप्ताहिक भुगतान होता है। पति-पत्नी को मिलाकर 1500 रुपए। बच्चों के काम करने पर 2500 रु. तक। औसतन 100 से 150 रु. प्रतिदिन की मजदूरी पड़ती है। ठेका प्रति हजार ईंट 700 रु. का है। साल के अंत में हिसाब होता है। यदि मजदूरी अधिक बनी तो कर्ज में समायोजित होती है। कम हुई तो बाकी राशि फिर कर्ज में जुड़ जाती है। अधिकांश परिवारों का कर्ज घटने के बजाय बढ़ता जाता है। कर्ज चुकाए बिना दूसरी जगह काम करने की अनुमति नहीं।

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