घरों में गोबर की मलरिया बन कर हुई तैयार
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
फाल्गुन मास की नवमी तिथि से होली के लिए घर-घर मे गोबर की मलरिया बनना प्रारंभ हो जाती हैं। प्रथम दिन 9 मलरिया बनाई गईं, फिर चौदस तक रोज जितनी चाहे उतनी बना सकते हैं। होलिका दहन व पूर्णिमा के दिन पांच मलरिया बनाते हैं एवं चांद एवं सूर्य की आकृति बनाई जाती है, साथ में एक टोपा बनाया जाता है। धुरेड़ी के दिन बच्चे उसमें रंग, गुलाल, गोबर एवं धूल भरकर होली की राख से भी होली खेलते हैं।
ज्योतिषी ने बताया कि इन मलरियों को फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल अथवा सायंकाल इनका पूजन किया जाएगा। इसके पहले होली का पूजन करते हैं। अपने घर के बाहर चौक बनाकर उन मलरियों को चौकी के ऊपर रखकर उसके ऊपर लाल रंग का झंडी लगाएंगे। अरंडी का वृक्ष की टहनी बीच में लगाएंगे। विधिवत रोली, हल्दी, चावल से पूजन कर आंटी बांधने के बाद बिंदी लगाकर और पूरी खीर का भोग लगाएंगे। उसके बाद नारियल फोड़ेंगे। दीपक लगाकर 4 फेरी लगाएंगे। इसके बाद होली की पूजन कर वह दीपक लगाकर फेरी लगाएंगे। होली में से एक कंडा लेकर आएं और फिर अपने घर की जो होली मलरिया हैं उनको जलांएगे, इसमें छोटी-छोटी आटे की बाटी को सेंककर प्रसाद रूप में ग्रहण करेंगे। पुरोहित ने बताया कि होलिका की न्योछावर जमादार को देना चाहिए। वहीं मलरिया को घर में रखें। परंपरा के अनुसार मलरियों की राख बच्चों को नजर लगने पर या बीमार होने पर दी जाती है। ऊपरी हवाओं का प्रकोप हो जाने पर भी इसकी धूप देने से तुरंत असर होता है ऐसा हमारे सनातन परंपराओं का विश्वास है। इस बार होली दहन का मुहूर्त 13 मार्च को रात 11 बजकर 26 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा है।