अभिषेक असाटी बक्सवाहा
सरकारी स्कूलों में निर्माण कार्यों और अन्य खर्चों के लिए शासन द्वारा डिजी-गोव ऑनलाइन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी रहे। लेकिन अब इसी सिस्टम में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। आरोप है कि बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) द्वारा स्कूलों के प्रधानाध्यापकों पर दबाव डालकर उनकी डिजी-गोव आईडी, पासवर्ड और ओटीपी मांगी जा रही है, जिससे गुपचुप तरीके से मनचाहे खातों में सरकारी राशि का भुगतान किया जा रहा है। शिक्षकों ने इस गंभीर मामले की जांच की मांग की है, क्योंकि इसमें बिना काम पूरा किए ही भुगतान निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है।
डिजी-गोव पासवर्ड के खेल में घोटाले की बू!
शिक्षकों के अनुसार, स्कूलों में डिजी-गोव सिस्टम के तहत विभिन्न विकास कार्यों और अन्य जरूरी खर्चों के लिए शासन द्वारा राशि भेजी जाती है। इस राशि की निकासी के लिए प्रधानाध्यापक अधिकृत होते हैं, जिनके पास सिस्टम का आईडी-पासवर्ड होता है। लेकिन अब बीआरसी कार्यालय द्वारा स्कूल प्रमुखों से ओटीपी मांगी जा रही है और दबाव बनाकर यह प्रक्रिया अपनाने को मजबूर किया जा रहा है। इसके जरिए कई मामलों में बिना काम पूरा किए ही भुगतान की खबरें सामने आ रही हैं।
बिना काम हुए ही भुगतान, शिक्षकों ने जताई चिंता
बीआरसी के इस कथित खेल को लेकर शिक्षक समुदाय में आक्रोश है। शिक्षकों का कहना है कि पहले भुगतान प्रक्रिया प्रधानाध्यापक के हाथ में होती थी, लेकिन अब बीआरसी अधिकारी डिजी-गोव का दुरुपयोग कर रहे हैं। जबरन ओटीपी लेकर राशि मनचाहे खातों में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और भी बढ़ गई है।
शिक्षकों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस मामले को लेकर कई सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने अपनी शिकायतें दर्ज करवाई हैं और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस गड़बड़ी की समय रहते जांच नहीं हुई तो सरकारी राशि का दुरुपयोग और बढ़ सकता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
इनका कहना है-
मुझे जानकारी प्राप्त हुई है मैं दिखवाता हूं नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी
–पार्थ जैसवाल कलेक्टर