प्रायवेट अस्पताल में जच्चा बच्चा की मौत के बाद खड़ा हुआ हँगामा, परिजनों का आरोप गलत इंजेक्शन लगने से हुई मौत
-शर्मा परिवार की भतीजी व आंगनबाड़ी में कार्यरत थी अश्विनी, 9 माह का था गर्भ, कोतवाली पुलिस कर रही जांच
सीहोर। गंगा आश्रम स्थित प्रायवेट सुयश अस्पताल में जच्चा बच्चा की मौत के बाद हँगामा खडा हो गया। परिजनों का आरोप है कि गलत इंजेक्शन लगने से मौत हुई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। परिजनों ने कोतवाली थाने में शिकायत भी दर्ज कराई। इधर देर रात पुलिस ने सुयश अस्पताल पहुँचकर वहाँ घेराबंदी की और जांच शुरु कर दी है।
मौत का केन्द्र बने प्रायवेट अस्पतालों में क्या ढर्रा चल रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। कुछ अस्पतालों में बड़ी घटना में एक ही डाक्टर सारे इलाज करते नजर आते हैं तो कुछ में होम्योपैथी के डाक्टर इलाज कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार पहलवान शर्मा परिवार चरखा लाइन छावनी सीहोर में स्व. गोपाल दास शर्मा की पुत्री अश्विनी (28 वर्ष ) का विवाह पलटन एरिया के शरद चतुर्वेदी से हुआ है। अश्विनी चतुर्वेदी आंगनबाड़ी में कार्यरत थी ओर नीलम शर्मा, शरद शर्मा, मुरली शर्मा की भतीजी है। गुरुवार को अश्विनी को गंगा आश्रम स्थित प्रायवेट सुयश अस्पताल में डिलेवरी के लिये ले जाया गया था। वह 9 माह की गर्भस्थ थीं। अश्विनी के भाई ईशान शर्मा ने बताया कि उसकी बहन को सुयश अस्पताल में इंजेक्शन आदि लगाया गया जिसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उनकी असामायिक मृत्यु हो गई। हालांकि परिजन तत्काल उसे जिला ट्रामा सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ले गये, लेकिन तब तक अश्विनी की मृत्यु हो चुकी थी। मामले में परिजनों ने कोतवाली पुलिस व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सूचना दी गई।

बताया जाता है कि जब सुयश अस्पताल में इलाज के पर्चे मांगे गये तो वहाँ के स्टाफ ने पूरे पर्चे हटा लिये बल्कि कुछ ही समय में सारे कागजात समेटकर अस्पताल के अधिकांश कर्मचारी वहाँ से रफूचक्कर हो गये, लेकिन कोतवाली पुलिस ने अस्पताल पहुँचकर वहाँ से आवश्यक सबूत जुटाये और कैमरे डीवीआर भी ले लिया ताकि उससे सबूत मिल सकें। मामले में कोतवाली पुलिस जांच कर रही है।