ठूंठ में तब्दील हो रहा सिलवानी का जंगल
रेंजर साहब कब करेंगे कार्रवाई या फिर रेंजर साहब की भी मिलीभगत है
सिलवानी विधानसभा विधायक रामपाल सिंह राजपूत का क्षेत्र
देवेश पाण्डेय सिलवानी रायसेन
उपवन मण्डल सिलवानी की उदासीनता के चलते वन माफिया के हौसले बुलंद हैं। वन माफिया हरे-भरे जंगलों की धडल्ले से कटाई कर रहे हैं। आलम यह है कि हरे- भरे जंगल धीरे-धीरे ठूंठ में तब्दील होते जा रहे हैं। इधर दूसरी ओर वन भूमि पर अतिक्रमण भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि सिलवानी क्षेत्र कभी सघन जंगलों से घिरा हुआ करता था और इसमें सागौन के वृक्ष लहलहाते हुए इठलाया भी करते थे सरकार द्वारा वृक्षों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद जंगलों का तेजी से सफाया जारी है। सिलवानी रेंज में सागौन माफियाओं द्वारा धडल्ले से हरे-भरे वृक्ष काटे जा रहे हैं। रक्षक भी भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि क्षेत्र में प्रतिदिन जंगल के सकरे रास्तों से अवैध सागौन लकडियां अन्य क्षेत्रों में जा रही हैं।

कई महीनों से नहीं हो पाई कोई बड़ी कार्रवाई
जैसा कि पूर्व में एसडीओ रहे आरके वैस के द्वारा लगातार कार्यवाही होती रहती थी साथ में दोनों ही रेंज पहले रेंजर श्री अहिरवार के समय पर भी आए दिन लकड़ी माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही का दौर चलता रहता था। जिसकी वजह थी कि कुछ हद तक सिलवानी के दोनों ही रेंज पूर्व और पश्चिम में वन विभाग चैन की नींद सो सकता था क्योंकि लकड़ी माफियाओं पर लगातार कार्रवाई से उनके हौसले पस्त हो गए थे। लेकिन जहां एसडीओ वैस के रिटायरमेंट एवं रेंजर अरविंद अहिरवार के बेगमगंज स्थानांतरण के बाद सिलवानी का पूरा जंगल खुली किताब की तरह दिखाई दे रहा है जहां से चारों तरफ सड़कों का जाल बिछाने के बाद सागर, उदयपुरा, बरेली, भोपाल ,गैरतगंज ,बेगमगंज के लिए लकड़ी माफियाओं के द्वारा आराम से जंगल साफ कर लकड़ियों का परिवहन किया जा रहा है वही अगर सूत्रों की मानें तो पूरे क्षेत्र में वन माफियाओं ने वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों से अपनी सांठगांठ बना ली। जिसकी वजह है कि जिस ओर से उनका माल निकलता है वन विभाग की टीम दूसरे रास्ते पर उनको पकड़ने के लिए निकल जाती है।

लाखों रुपए का डीजल हो रहा खर्च
ऐसा नहीं कि वन विभाग ने कार्यवाही के लिए वाहन एवं डीजल खर्च वन विभाग को ना दिया जा रहा बड़ी संख्या में रेंजर ,नाकेदार, बीट गार्ड, सभी अधिकारी हरे-भरे जंगल की सुरक्षा के लिए तैनात, लेकिन जैसा कि अगर चोर और सुरक्षा में गठबंधन हो जाए तो फिर क्या अधिकारी एवं वन माफियाओं के बीच गठबंधन हो चुका है और यह गठबंधन अगर शीघ्र अति शीघ्र नहीं टूटता है तो सिलवानी के जंगल वीरान होने में अधिक समय नहीं लगेगा।