दस सूत्रीय मांगो को लेकर फेक्ट्री कर्मियों ने की अनिश्चिकालीन हड़ताल, धरना-प्रदर्शन शुरू होते ही झुका इस्पात गोदावरी प्रबंधन
पुलिस प्रशासन की मध्यस्थता के बीच बनी सहमति
सुरेंद्र जैन धरसीवा
सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र के फेस वन में स्थित फेक्ट्री में कार्यरत सैकंड फेक्ट्री कर्मियों ओर श्रमिकों ने अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.श्रमिकों व कर्मचारियों के इस आंदोलन में कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी सामिल है.दस सूत्रीय मांग में प्रमुख रूप से बारह घंटे की ड्यूटी को नियमानुसार आठ घंटे करने की मांग है.यहां यह बताना लाजमी होगा कि अधिकांश उद्योगों में श्रमिक ठेकेदार भी श्रमिकों से काम तो बारह घंटे कराते हैं जबकि उन्हें मेहनताना मात्र आठ घंटे का ही देते हैं और अधिकांश जगह ईएसआईसी का लाभ भी स्थानीय ग्रामीण महिला श्रमिकों को नहीं दिया जाता

अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू होते ही झुका इस्पात गोदावरी प्रबंधन
पुलिस प्रशासन की मध्यस्थता के बीच बनी सहमति
हीरा ग्रुप की इस्पात गोदावरी एंड पावर लिमिटेड के खिलाफ श्रमिकों कर्मचारियों ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी दस सूत्रीय मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करते ही फेक्ट्री प्रबंधन झुका ओर जिम्मेदार अधिकारियों की मध्यस्थता के बीच आंदोलनकारियों की मांगों पर आम सहमति बनी।

जानकारी के मुताबिक गोदावरी प्लांट के समीपवर्ती जनप्रतिनिधियों द्वारा मजदूरों की मांगों को लेकर पूर्व में ही चेतावनी दी गई थी कि वह 11 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर प्लांट का गेट बंद करेंगे उसी के तहत अपनी दस सूत्रीय मांग पहली मांग 10 वर्ष से कार्यरत सप्लाई वर्करों का नियमितीकरण किया जाये दूसरी मांग सप्लाई वर्करों की ड्यूटी बारह घंटे की जगह 8 घंटे निर्धारित की जाए तीसरी मांग महिला एवं पुरुष—सभी वर्करों को कलेक्टर दर पर भुगतान दिया जाए चौथी मांग स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता दी जाए और आस-पास के गांवों को संयंत्र की वैकेंसी की सूचना दी जाए पांचवीं मांग सामाजिक सरोकार मद (CSR) से गांवों में विकास कार्य कराए जाएँ छठवीं मांग दिवाली में बोनस के रूप प्रत्येक वर्कर को 20 हजार दिया जाए सातवीं मांग दुर्घटना होने पर घायल कर्मचारी को प्रबंधक के द्वारा 25 लाख और मृतक को 50 लाख तक की राशि दी जाये आठवीं मांग कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था प्रदान किया जाए नौवीं मांग घास जमीन पर किए गए कब्जे को छोड़ा जाए एवं दसवीं मांग टाडा से लेकर चरौदा मार्ग को तुरंत कार्य प्रारंभ किया जाए उक्त माँगें पूरी नहीं होने तक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी की चेतावनी दी गई तो प्रबंधन में खलबली मच गई ओर फिर स्थानीय प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की मध्यस्थता के बीच प्रबंधन ओर आंदोलनकारियों की चर्चा चली जिसमें अंततः प्रबंधन ने स्थानीय लोगों को उनकी योभ्यता के आधार पर रोजगार में प्राथमिकता देने,10 वर्ष से अधिक समय से कार्य कर रहे श्रमिकों को उनकी योग्यता कार्यकुशलता के आधार पर नियमितीकरण करने,श्रमिकों को बोनस का भुगतान शासन करने,कंपनी प्रबंधन द्वारा आसपास के गांव में पानी टैंकर की व्यवस्था कराने, सभी श्रमिको की हयूरी 12 घण्टे की जगह 8 घण्टे 12 अप्रैल से ही करने , सभी महिलाओ को शासन द्वारा निर्धारित दर पर भुगतान करने,सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत प्रतिवर्ष गांवों में कार्य कराने शारीरिक रूप से अक्षम (कार्यक्षेत्र की दुर्घना) के श्रमिकों को योग्यतनुसार कार्य देने एवं निर्धारित समय से ज्यादा काम नहीं कराने पर श्रमिकों को भोजन की व्यवस्था कैंटीन से कराने नियमयानुसार श्रमिको की प्रतिवर्ष बेमेतन वृद्धि करने पर प्रबंधन सहमत हुआ इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ आंदोलन में सैंकड़ो कर्मचारियों श्रमिकों के अलावा सरपंच प्रतिनिधि उमेश निशाद मुरेठी सांकरा सरपंच रघुनाथ साहू आदि मुख्य रूप से सामिल थे