विदिशा। मूक एवं बोलती फिल्मों में सफल अभिनय के बाद अपने शास्त्रीय गायन द्वारा देश भर में प्रतिष्ठा अर्जित करने वाले पं गंगा प्रसाद पाठक के 50 वे पुण्य स्मरण पर आयोजित कार्यक्रम का आरंभ नगर के गायक श्री यशवंत शर्मा के राग श्याम कल्याण के गायन से हुआ ।
आपने विलंबित ऐकताल में निबद्ध रचना ” सोहत सियाराम से किया । सपाट स्वर विस्तार में स्वरों के नियंत्रण और अपनी कल्पनाशीलता से सजाने के बाद श्री यशवंत शर्मा ने मध्यलय तीनताल में निबद्ध रचना ” वृंदावन दधि बेचे गुजरिया “की भावपूर्ण प्रस्तुति के बाद पं तुलसी राम देवांगन के योग्य शिष्य पं. यशवंत शर्मा ने देवांगन जी रचित तराना भी सुनाया । यशवंत जी के साथ तबले पर श्री शशिकांत शर्मा एवं हारमोनियम पर पं नीलेश तिवारी ने रोचक संगत की । कार्यक्रम के अगले चरण में ग्वालियर घराने के प्रसिद्ध गायक पं सज्जन लाल ब्रह्मभट्ट द्वारा लिखित पुस्तक ग्वालियर घराने के मूर्धन्य गायक पं गंगा प्रसाद पाठक का विमोचन हुआ। विमोचन के पश्चात अपने संक्षिप्त उद्बोधन में पं सज्जन लाल ब्रह्मभट्ट ने पाठक जी के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुये पाठक जी के साथ अपने बचपन,पाठक जी से गायन की तालीम लेने के अनुभव बताते हुये पाठक जी की गायन शैली पर प्रकाश डाला ।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में देश की लोकप्रिय शास्त्रीय गायिका भोपाल की श्रीमती सुलेखा भट्ट का गायन हुआ। श्रीमती सुलेखा भट्ट ने अपने गायन का आरंभ राग वाचस्पति से किया । राग वाचस्पति में विलंबित एक ताल में निबद्ध रचना सांवरिया मन भाया में आपने ग्वालियर घराने परंपरानुसार अपनी कर्णप्रिय आवाज़ में क्रमिक स्वर विस्तार शुरू किये । तबला वादक डॉक्टर अशेष उपाध्याय द्वारा विलंबित ऐकताल में भराव के दौरान डग्गे की गूंज और हारमोनियम पर पं प्रकाश पाठक जी की की चपल उंगलियां श्रोताओं को श्रोताओं को विशेष आकर्षित कर रही थीं । बहलावे और बोल आलाप के बाद सरगम और बोलतानों में स्पष्ट आकार वाली द्रुत तानों ने राग सौंदर्य में विशेष वृद्धि की । मध्य लय तीनताल में “अब तो मोरी मान सांवरिया में भावपूर्ण सरगम और विभिन्न लयकारियों ने समां बांधा।

आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की टॉपग्रेड गायिका सुलेखा भट्ट ने राग वाचस्पति के बाद सूफ़ी रचना नैना अपने पिया से लगा आई के बाद राग भोपाली में अद्धा ताल में” ओ मिल महल में यार ” गाने के बाद कबीर भजन “सुनता है गुरु ज्ञानी “सुनाकर कुमार गंधर्व जी का स्मरण कराया देश के लगभग सभी संगीत सम्मेलनों में गायन कर चुकीं श्रीमती वीणा सहस्त्र बुद्धे जी की सुयोग्य शिष्या सुलेखा भट्ट ने मीरा के भजन ” म्हारे घर आवो जी प्रीतम प्यारा से अपने गायन को विराम दिया ।
कार्यक्रम के आरंभ में कलाकारों और न्यासियों ने मां सरस्वती एवं पाठक जी के चित्र के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया । न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद देवलिया ने न्यास के गठन और कार्यक्रम पर अपना स्वागत वक्तव्य दिया।कलाकारों का स्वागत उद्योगपति श्री विनोद गुप्ता, डॉक्टर नवीन शर्मा,समाज सेवी राजकुमार सरार्फ, चक्रवर्ती जैन,श्री भरत लढ़्ढा ,अनंत सिंह,श्री बृजकिशोर गोयल,श्री सतीश खत्री एवं नारायण सदाशिव राव पिंगले सेवा संस्थान के श्री सुनील पिंगले ने किया ।

विदिशा कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता की विशेष उपस्थिति के साथ लोक गायक पं नारायण प्रसाद शर्मा, श्रीमती भावना विश्वकर्मा,श्री लक्ष्मण सिंह श्री रईस अहमद, वरिष्ठ कवि श्री कालूराम पथिक,श्री गोवर्धन राजौरिया,श्री बृज श्रीवास्तव,श्री कामरेड माधोसिंह, रविन्द्र स्वप्निल प्रजापति, श्री बृज ,शायर श्री शाहिद अली शाहिद श्री नज़ीर नूरी, प्रोफेसर वनीता बाजपेयी,श्री जे एस चोहान,श्री के के पंजाबी, श्री अस्मुरारी नंदन,श्री रामू विश्वकर्मा श्री उदय ढोली के अतिरिक्त संगीतानुरागी छात्र भी उपस्थित थे ।
पाठक न्यास द्वारा माहेश्वरी धर्मशाला में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन श्री सुदिन श्रीवास्तव एवं आभार सचिव श्री सुनील जैन ने व्यक्त किया। न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष गोविन्द देवलिया सहित समस्त न्यासीगणो बृजकिशोर गोयल,अरविंद द्विवेदी,अनंत सिंह,सतीश खत्री, चक्रवर्ती जैन, डॉ नीरज शक्ति निगम आदि ने,11 तारीख़ शनिवार को रविन्द्र नाथ टैगोर आडिटोरियम में रात के 7.30बजे ,नाटक ययाति की प्रस्तुति को देखने हेतु,उपस्थित होने का अनुरोध किया हैं ।