बिना नंबर की गाड़ी से हो रहा था अवैध परिवहन, कार्रवाई पर जानकारी देने से बचते रहे रेंजर; बोले- ऊपर से चुप रहने के आदेश हैं
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
सामान्य वन मंडल रायसेन की गढ़ी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत वन माफियाओं के हौसले पस्त करने के लिए वन अमले ने शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर बेशकीमती सागौन की सिल्लियों से भरा एक मालवाहक वाहन जब्त किया गया है। वन अमले ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ़्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी भागने में सफल रहा।
जानकारी के मुताबिक, रात को करीब 12 बजे ग्राम अगरिया कलां मार्ग पर वन अमले ने एक संदिग्ध बिना नम्बर प्लेट का मालवाहक वाहन को रोका। तलाशी लेने पर उसमें ताजी कटी हुई सागौन की सिल्लियां मिलीं, जिनकी अनुमानित क़ीमत 60 हजार रुपये बताई जा रही है।
इस मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों राजेश जैन और बबलेश रैकवार दोनों निवासी कस्बा गढ़ी को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक अन्य आरोपी शुभम रैकवार अंधेरे का फ़ायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। पकड़े गए वाहन पर पहचान छिपाने के लिए नंबर प्लेट नहीं लगाई गई थी, लेकिन जांच में वाहन का नंबर एमपी04 जीए6720 ट्रेस हुआ है, जिसका मालिक स्वयं आरोपी राजेश जैन है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी का तर्क: ‘मुझे बोलने की अनुमति नहीं’
एक ओर जहाँ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सागौन की अवैध कटाई हो रही है, वहीं जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया चौंकाने वाला है। जब इस कार्रवाई के संबंध में गढ़ी रेंजर धीरेंद्र पांडे से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें चुप रहने के आदेश दिए हैं। रायसेन सामान्य वन मंडल के एसडीओ सुधीर पटलेने मामले की पुष्टि की। आरोपियों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। लकड़ी और वाहन को जब्त कर गढ़ी कार्यालय में खड़ा कराया गया है। फरार आरोपी की तलाश जारी है।
सक्रिय है माफिया, विभाग पर उठ रहे सवाल
गढ़ी वन परिक्षेत्र इन दिनों वन माफियाओं के लिए सुरक्षित चारागाह बनता जा रहा है। रात के समय बिना नंबर के वाहनों से लकड़ी काटकर बाजारों में खपाई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मैदानी स्तर पर वन अमले की निष्क्रियता के कारण ही माफिया इतने बेखौफ हैं। ताजा कार्रवाई के बाद अब यह देखना होगा कि विभाग इस गिरोह की जड़ तक पहुँच पाता है या यह केवल एक खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।