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बालमपुर घाटी बनी हादसों की घाटी,15 दिन में चौथी दुर्घटना

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-ट्राला तालाब में उतरा, बड़ा हादसा टला, 15 किलोमीटर मार्ग पर 15 दिन में 13 से ज्यादा दुर्घटनाएं, कई लोग घायल

मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन 

भोपाल-विदिशा हाईवे 18 पर स्थित बालमपुर घाटी अब लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण “हादसों की घाटी” के रूप में बदनाम होती जा रही है। महज 15 दिनों के भीतर यहां चौथी बड़ी दुर्घटना सामने आई है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
ट्राला अनियंत्रित होकर तालाब में उतरा
जानकारी के अनुसार ब्यावरा से मंडीदीप जा रहा ट्राला (HR 38 BY 7823) सोमवार-मंगलवार देर रात बालमपुर घाटी उतर रहा था। इसी दौरान सामने से ईंटों से भरा 407 वाहन आ गया। उसे बचाने के प्रयास में ट्राला चालक ने अचानक मोड़ लिया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने तालाब में उतर गया।
ट्राला चालक सोनू राजपूत निवासी हरियाणा ने बताया कि सुखी बाईपास बंद होने के कारण वह ट्राला लेकर दीवानगंज रायसेन से होते हुए मंडीदीप के पास स्थित 11 मील जा रहा था और बालमपुर घाटी का अंदाजा नहीं लगा पाया। अचानक सामने वाहन आने से नियंत्रण खो बैठा।
बाल-बाल बची जान
गनीमत रही कि ट्राले के तालाब में उतरते समय पिछले पहिए मिट्टी में धंस गए, जिससे वह पूरी तरह पानी में नहीं पलटा। यदि ट्राला तालाब में पलट जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। क्योंकि तलब की गहराई काफी ज्यादा थी।
ग्रामीणों में आक्रोश, घाटी सुधार की मांग
लगातार हो रही दुर्घटनाओं से परेशान आसपास के गांवों के ग्रामीण अब इस घाटी को “दुर्घटना घाटी” कहने लगे हैं। उनका कहना है कि यहां सबसे ज्यादा ट्रक और ट्राले दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटी की ऊंचाई कम कर इसे समतल किया जाए, ताकि बार-बार हो रही दुर्घटनाओं पर रोक लग सके।
स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक यहां कई लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आगे और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। घाटी से लेकर त्रिमूर्ति चौराहे तक 15 दिन के अंदर 13 से ज्यादा बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी है जिनमें कई लोग घायल हुए हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, घाटी सुधार की मांग
लगातार हो रही दुर्घटनाओं से परेशान आसपास के गांवों के ग्रामीण अब इस घाटी को “दुर्घटना घाटी” कहने लगे हैं। उनका कहना है कि यहां सबसे ज्यादा ट्रक और ट्राले दुर्घटनाग्रस्त होते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटी की ऊंचाई कम कर इसे समतल किया जाए, ताकि बार-बार हो रही दुर्घटनाओं पर रोक लग सके।
कई जा चुकी हैं जानें
स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक यहां कई लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आगे और बड़े हादसे हो सकते हैं।

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