रानी के सम्मान में बनवाया था सबसे बड़ा रानी सागर तालाब
भाजपा संगठन के प्रयास त्रिदिवसीय कुंवरगढ़ महोत्सव का आगाज 31 मार्च से
सुरेंद्र जैन धरसीवां रायपुर
सांकरा निको।छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ों में से एक गढ़ कुंवरगढ़ आदिवासी गोंडवाना संस्कृति का प्रतीक है रायपुर बिलासपुर राजमार्ग पर धरसीवां से चार किलो मीटर की दूरी पर स्थित राजा कुंवरसिंह की रियासत कुंवरगढ़ अपने आप में अपने रोचक इतिहास को समाहित किए हुए है कभी इस रियासत में 126तालाब हुआ करते थे जिनमें सबसे बड़ा तालाब है रानी के सम्मान में बनवाया गया था जिसका नाम रानी सागर तालाब है सत्ताधारी दल भाजपा के प्रयासों से यहां 31 मार्च से त्रिदिवसीय कुंवरगढ़ महोत्सव का आगाज होगा जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे इसी दिन वह कई बड़ी सौगात भी कुंवरगढ़ को देंगे।
राजा कुंवरसिंह की रियासत कुंवरगढ़ के विकास की यदि हम बात करें तो राजा कुंवरसिंह की रियासत रहे कुंवरगढ़ को धीरे धीरे लोग कुरा कहने लगे थे ग्राम पंचायत कुरा के नाम से प्रसिद्ध हो चले कुंवरगढ़ में समस्याओं का अंबार था लेकिन जब 2003 में देवजी भाई पटेल भाजपा के टिकिट से पहली बार धरसीवा विधानसभा के विधायक बने तो उन्होंने इस क्षेत्र के जमीनी स्तर पर विकास के लिए काफी प्रयास किए
2003से 2018 तक विधायक रहते हुए देवजी भाई पटेल ने ग्राम पंचायत कुरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलवाया ओर जब प्रथम चुनाव हुए तो भाजपा का नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुआ ओर फिर कुरा यानी कुंवरगढ़ के विकास की तीव्र यात्रा शुरू हुई धरसीवा विधानसभा के खरोरा को भी उसी समय देवजी भाई पटेल ने नगर पंचायत का दर्जा दिलाया जमीनी स्तर पर विकास के मसीहा बने देवजी भाई पटेल के कार्यकाल को आज भी क्षेत्र के लोग क्षेत्र के विकास के स्वर्णिम काल के रूप में मानते हैं राजा कुंवरसिंह की रियासत कुंवरगढ़ के विकास में भाजपा विधायक देवजी भाई पटेल के बाद कांग्रेस विधायक श्रीमती अनिता योगेंद्र शर्मा ने भी काफी रुचि दिखाई
राजा कुंवरसिंह की रियासत कुंवरगढ़ को समस्या मुक्त कराने करोड़ो के विकास कार्य करवाने में तत्कालीन विधायक देवजीभाई पटेल ने अहम भूमिका निभाई ओर अब भाजपा सरकार संगठन के प्रयासों से इतिहास में पहली बार कुंवरगढ़ महोत्सव का आयोजन कर रही है
ये हैं राजा कुंवरसिंह की रियासत की विशेषता
जनमानस में कुंरा के नाम से जाना जाता है। रायपुर जिले के धरसींवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला यह नगर मात्र एक भौगोलिक इकाई नही बल्कि जीवंत आस्था और प्राचीन शिल्प का एक ऐसा केन्द्र है जहाँ आज भी बुजुर्गों की चौपालों पर बीते कल के अनसुलझे रहस्यो और देवताओं के महिमा की चर्चा होती है।
कुँवरगढ़ के इतिहास के केन्द्र में गोड राजा कुँवरसिंह का नाम स्वर्ण अक्षरो में अंकित है। उनके दौर में इस क्षेत्र में 126 तालाब हुआ करते थे, इनमें से रानी सागर तालाब राजा के रानी के सम्मान का प्रतीक है, तो वही बुढा तालाब जनजातीय संस्कृति के आराध्य बुढा देव के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।
प्रमुख धरोहरः
यह जगह अपने बड़े तालाबों और बावड़ियों के लिए जानी जाती है, जिनमें रानी सागर, बुढ़ा तालाब और मामा-भांचा तालाब प्रमुख हैं। गाँव के पश्चिम में एक प्राचीन शिव मंदिर के खंडहर और कई सती शिलाखंड मौजूद हैं। कुँवरगढ की आधार शिला इस प्रकार रखी गई थी, कि चारो दिशाओ की दिव्य शक्तियों द्वारा संरक्षित रहे। नगर के उत्तर में कंकालीन, दक्षिण में माता चंडी, पश्चिम में माता महामाया और पूर्व में भगवान चतुर्भुजी विराजमान है। कुँवरगढ की ऐतिहासिक धरोहरो में लोक कथाओ के अनुसार गुप्त सुरंग भी उल्लेखनीय है, जो प्राचीन काल में सामरिक सुरक्षा का एक गोपनीय माध्यम थी।
सांस्कृतिक विशेषताः
यहाँ के मदिरों में नागरी लिपि के शिलालेख होने के प्रमाण मिलते हैं, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाते हैं। विशेष रूप से भगवान चतुर्भुजी का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि कुँवरगढ की आत्मा है। ग्रामीण कथाओं के अनुसार इस भव्य मंदिर का निर्माण उस छहमासी रात और छहमासी दिन के युग में हुआ था, जब समय की गति आज जैसी नही थी। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में स्थित यह मंदिर अपनी सूक्ष्म नक्काशी और प्राचीन वास्तु कला से शोध कर्ताओं को आज भी अचंभित करते है।
स्वतंत्रता संग्रामः
यह भूमि स्व. कंवल सिंह सेन, स्व. गुरुचरण सिंह छाबड़ा, दाऊ दानवीर तुलाराम आर्य और स्व. बिसाहू राम दुबे जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कर्मस्थली रही है। यहाँ के बुजुर्गो की स्मृतियों में वह दौर आज भी किसी ताजा तस्वीर की तरह सुरक्षित है, जब हिन्दु मुस्लिम एकता केवल नारों तक सीमित नही थी, बल्कि उनके व्यवहार का अटूट हिस्सा थी। वे बड़े गर्व से बताते हैकि कैसे इद की खुशिया और मुहर्रम के गम में पुरा नगर एक हो जाता था। इस सदभाव की पराकाष्ठा यहा की एतिहासिक राम लीला देखने को मिलती है। कुवरगढ की राम लीला की नीव एक मुस्लिम परिवार द्वारा रखा जाना इस बात का जीवन्त साक्ष्य है कि यहा कि मिट्टी में आपसी प्रेम के बीच कितने गहरे धसे है।
शुरू से ही साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल रहा है कुंवरगढ़
कुंबरगढ़ जहां प्राचीन भारतीय सभ्यता संस्कृति को अपने में समाहित किए है तो वही प्राचीन काल से ही यह सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करता रहा है कुंवरगढ़ में एक ही नींव पर मंदिर ओर मस्जिद का होना साथ ही प्राचीनकाल से चली आ रही रामलीला की स्थापना एक मुस्लिम माल गुजार द्वारा करना एवं रामलीला के पात्रों में मुस्लिम धर्म के अनुयायि की सहभागिता सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल है
मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ विधायक भी रहेंगे मौजूद
कुंवरगढ़ महोत्सव का शुभारंभ 31 मार्च को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे भारतीय जनता पार्टी संगठन के अथक प्रयास क्षेत्रीय विधायक अनुज शर्मा के अथक प्रयासों का प्रतिफल है कि कुंवरगढ़ में पहली बार कुंवरगढ़ महोत्सव का आयोजन हो रहा है इसकी व्यापक तैयारियों में पूरा प्रशासन जुटा है जनपद सीईओ आशीष केशवानी तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे ग्रामीण जनप्रतिनिधि भाजपा संगठन के लोग कुंवरगढ़ महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं