विधानसभा को सार्थक गंभीर, गरिमामय और रचनात्मक विचार-विमर्श का मंदिर बनाए- विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी
भोपाल। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि विधानसभा को शोर-शराबे का स्थान नहीं, बल्कि गंभीर, गरिमामय और रचनात्मक विचार-विमर्श का मंदिर बनाएं, जहाँ से जनकल्याण की दिशा तय हो और लोकतंत्र सशक्त बने।
श्री देवनानी मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय युवा विधायकों के सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र को संबोधित कर रहें थे। सम्मेलन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, विधानसभाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रतिपक्ष के नेता भी मौजूद थे।
श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल एक भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का प्रतीक होती है। यह वह मंच है जहाँ जनप्रतिनिधि जनता की आशाओं, अपेक्षाओं और समस्याओं को आवाज देते हैं। ऐसे पवित्र स्थल को शोर-शराबे, अव्यवस्था और हंगामे का केंद्र बनाना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी अन्याय है।
श्री देवनानी ने कहा कि विधानसभा में सार्थक विचार-विमर्श के साथ तर्क, तथ्यों और मर्यादा के साथ चर्चा होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से बहस हो, नीतियों का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए और सकारात्मक समाधान खोजे जाएँ। स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान यही है कि मतभेद होते हुए भी संवाद की गरिमा बनी रहे ।जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन संयम, शालीनता और अनुशासन के साथ करें। व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर राज्य और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। जब विधानसभा में सार्थक बहस होगी, तभी नीतियाँ प्रभावी बनेंगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा।

देवनानी ने कहा कि यह मंच केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को एक नई दिशा देने का संवाद मंच है। तीन प्रदेशों का यह युवा संगम का मूल दर्शन संसदीय कूटनीति और साझा विधायी मूल्यों को गरिमामय बनाना है।उन्होंने कहा कि लोकतन्त्र में जनता के चुने प्रतिनिधियों और नागरिकों की भूमिका में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है ।युवा विधायकों को विधायिका का प्रमुख आधार बन कर और पूरी प्रतिबद्धता और सक्रियता के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्रों की तरह ही विधायिका के काम को भी पूरा महत्व देना चाहिए तभी वे जनता के बीच अपनी प्रतिभा की बेजोड़ छाप छोड़ सकेंगे।युवा नेतृत्व की क्षमता नवीन दृष्टि विकास की नीति निर्धारण में अहम साबित हो सकती है।उन्हें नागरिकों और विधायिका के बीच का अंतराल पाटना होगा और आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए विकास में अपनी सार्थक सहभागिता की भूमिका को साबित करना होगा।
विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी का सोच है कि विकसित भारत @2047 का संकल्प पूरा करने के लिए हर जन प्रतिनिधि विशेष कर युवा जनप्रतिनिधियों अपना सक्रिय योगदान दे । विकसित भारत @2047 का संकल्प तक पूरा नहीं सकेगा जब तक समाज के अन्तिम छोर पर बैठे व्यक्ति का विकास नहीं होता ।
श्री देवनानी ने सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 45 वर्ष से कम आयु के विधायकों की भागीदारी को “विधायी ऊर्जा का त्रिवेणी संगम” बताया और कहा कि युवा जनप्रतिनिधि देश के एक बड़े वर्ग ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिए नीति-निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी भविष्य की आवश्यकताओं को दिशा दे सकती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि युवा विधायकों को सदन में पूरी तैयारी के साथ बोलना चाहिए तथा जन हित से जुड़े मुद्दों के साथ हो अधिक से अधिक प्रश्न पूछने चाहिए ताकि शासन के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो सके। इसके अलावा सीनियर लीडर्स के भाषणों को भी सुनना चाहिए तथा उनके अनुभवों से सीखना चाहिए । साथ ही पुस्तकालयों में जाकर सन्दर्भ सामग्री का अध्ययन करना चाहिए । देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि चुने हुए जन प्रतिनिधियों और नागरिकों की निरंतर सहभागिता से ही उसकी सार्थकता बनी रह सकती है। युवा विधायकों को अपने ‘प्रतिनिधित्व’ को ‘सार्थक सहभागिता’ में बदलने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने तकनीक के उपयोग से नागरिकों और विधायिका के बीच संवाद को मजबूत करने तथा डिजिटल माध्यमों से जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।श्री देवनानी ने बताया कि ‘वन नेशन-वन एप्लिकेशन’ के तहत नेवा प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल नवाचार लोकतंत्र को अधिक पारदर्शी और सुलभ बना रहे हैं। युवा विधायकों की भूमिका डिजिटल डिवाइड को समाप्त कर लोकतंत्र को तकनीक आधारित बनाने में महत्वपूर्ण है।
श्री देवनानी ने युवा विधायकों से अपील की कि वे विधानसभाओं को सार्थक विमर्श का मंच बनाएं और शोर-शराबे की राजनीति से ऊपर उठकर समाधान आधारित संवाद को बढ़ावा दें। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा को इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन के निष्कर्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। सदन की कार्यवाही पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि विधायकों को प्रत्येक विधेयक पर तथ्य और शोध आधारित चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने विधायी समितियों को ‘लघु विधायिका’ बताते हुए कहा कि इन समितियों में सक्रिय भागीदारी से शासन की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के सत्र अधिक से अधिक होने चाहिए। राजस्थान विधानसभा में चौबीस सीटिग हो गई है और हम इसे पैंतीस तक बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर बोलते हुए देवनानी ने कहा कि यह केवल आर्थिक प्रगति का नहीं, बल्कि समावेशी विकास का संकल्प है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नवाचार, स्टार्टअप, कौशल विकास, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल समावेशन जैसे विषयों पर नीति-निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि राज्यों के विकास के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। सीमित संसाधनों के बीच प्राथमिकताओं का संतुलन बनाना युवा विधायकों की सबसे बड़ी परीक्षा है। उन्हें सामाजिक निगरानी समितिया बनाने के साथ विकास कार्यों की सोशल ऑडिट करवाने के प्रयास भी करने चाहिए । साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए ।
देवनानी ने देश की सनातन संस्कृति और सांस्कृतिक अस्मिता को ओझल नहीं होने दे ।विरासत के संरक्षण पर भी जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ परंपराओं को सहेजना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकास का मॉडल तभी टिकाऊ होगा जब वह स्थानीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़ा हो।
श्री देवनानी ने बताया कि राज्य विधानसभा में विधायकों द्वारा पूछे गए के 97 प्रतिशत प्रश्नों के जवाब राज्य सरकार से प्राप्त हो गए है और हमारा लक्ष्य इसे शत प्रतिशत तक पहुंचाना है। राजस्थान विधानसभा में किए गए नवाचारों की चर्चा करते हुए कहा कि श्री देवनानी ने बताया कि विधानसभा में बनाए गए डिजिटल म्यूज़ियम और राजनीतिक आख्यान संग्रहालय को जन दर्शन के लिए खोल दिया गया है और अब तक पचास हजार से अधिक लोग इसे देख चुके है।
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