मध्य क्षेत्र के सहकार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने संगोष्ठी में रखें प्रभावी विचार
सी एल गौर रायसेन
केशव न्यास रायसेन के तत्वाधान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत निश्चित किए गए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, इसी क्रम में खंड स्तर पर प्रमुख जन गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है,इसी कड़ी में रायसेन खंड की प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन शुक्रवार 13 फरवरी को आनंद किरण विद्यालय रायसेन में किया गया।
इस प्रमुख जन गोष्ठी में रायसेन खंड के विभिन्न श्रेणियां के बंधु उपस्थित हुए माता बहनों की संख्या भी गोष्ठी में उपस्थित थी प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य रूप से हेमंत जी मुक्तिबोध मध्य क्षेत्र सहकारवाह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर प्रारंभ किया गया, अपने उद्बोधन में हेमंत जी मुक्तिबोध द्वारा संघ की 100 वर्षों की यात्रा के विभिन्न चरणों को विस्तार से रखा गया उनके द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में हुई थी जिसमें मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर राष्ट्र के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभा सकता है। संघ की इस 100 वर्षों की यात्रा में संघ को अपना लक्ष्य प्राप्त करने में अनेक पढ़ावो को पार करना पड़ा जिसमें संघ की उपेक्षा हुई विरोध हुआ लेकिन संघ के कार्य करता अपने मार्ग पर अटल रहे, आगे बढ़ते रहे और धीरे-धीरे समाज का प्रेम एवं स्नेह संघ को मिला और आज सॉन्ग एक बट वृक्ष के रूप में खड़ा हुआ है। इन 100 वर्षों की यात्रा में

संघ ने दसों दिशाओं में समाज को संगठित करने संस्कारित करने तथा किसी भी प्रकार की विपत्ति समाज पर आई है तो उसमें समाज के साथ खड़ा होने का काम किया है आज संघ के माध्यम से अनेक सेवा कार्य पूरे देश में संचालित किया जा रहे हैं प्रमुख जन गोष्ठी के माध्यम से संघ का उद्देश्य है कि समाज में उपस्थित सज्जन शक्ति भी संघ के विचार के साथ मिलकर समाज की सेवा करें तथा राष्ट्र के पुनर् निर्माण में अपनी भूमिका निभाऐ। उन्होंने अनेक उदाहरण देकर बताया कि जब तक हमारा समाज संगठित और संस्कारों से युक्त नहीं होगा तब तक राष्ट्र को परम वैभव प्राप्त होना संभव नहीं है इसलिए सभी वर्गों को अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार इस कार्य में लगना होगा द्वितीय सत्र में उपस्थित जनों के द्वारा संघ के संबंध में पूछे गए अनेक प्रश्ननो का उत्तर देते हुए श्री हेमंत जी मुक्तिबोध द्वारा समाधान किया गया उन्होंने अपने उद्बोधन में संघ के शताब्दी वर्ष में समाज के करणीय पंच परिवर्तन के विषय पर विस्तार से समझाया गया उन्होंने समरसता, पर्यावरण ,स्वदेशी का भाव, कुटुंब प्रबोधन ,तथा नागरिक शिष्टाचार इन पांच विषयों पर विस्तार से बात की गई तथा सभी से आह्वान किया कि इन पांच विषयों पर काम करने से निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे अंत में वंदे मातरम गायन के साथ गोष्ठी का समापन किया गया।