रामभरोस विश्वकर्मा मंडीदीप रायसेन
सतलापुर क्षेत्र में सामने आए कथित संगठित धर्मांतरण प्रकरण को लेकर विश्व हिंदू परिषद जिला भोजपुर की शिकायत पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए मध्यप्रदेश पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को सख़्त निर्देश जारी किए हैं।
NHRC ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर दोषी संगठनों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध गहन जांच की जाए। आयोग का मानना है कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को चमत्कार, झूठे इलाज, आर्थिक प्रलोभन और भय दिखाकर मानसिक व भावनात्मक रूप से प्रभावित किया गया।
डिजिटल माध्यमों से ब्रेनवॉश की जांच
आयोग ने जांच में यह बिंदु भी शामिल किया है कि Whats App और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भ्रामक स्वास्थ्य संदेश फैलाकर लोगों को प्रभावित किया गया। साथ ही, पहचान पत्र एकत्र करने और डिजिटल सबूत मिटाने की साजिश की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विदेशी फंडिंग और आर्थिक अनियमितताएं रडार पर NHRC ने गृह मंत्रालय (FCRA) को निर्देश दिए हैं कि कथित संगठनों की अवैध विदेशी फंडिंग की जांच की जाए। इसके अलावा, आयकर विभाग को फर्जी ट्रस्टों, टैक्स छूट के दुरुपयोग और अन्य आर्थिक अनियमितताओं की विस्तृत पड़ताल के आदेश दिए गए हैं।
धर्मांतरण के बाद आरक्षण का मुद्दा
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि धर्मांतरण के बाद भी अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र का दुरुपयोग पाया जाता है, तो उसे निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाए।
दो सप्ताह में रिपोर्ट अनिवार्य
NHRC ने सभी संबंधित विभागों को दो सप्ताह के भीतर Action Taken Report प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि दोष सिद्ध होने की स्थिति में दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे।
आयोग का स्पष्ट संदेश है कि छुपा हुआ या दबाव में कराया गया धर्मांतरण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है!और मानवाधिकारों से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।