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अतिथि विद्वानों की भर्ती पूरी पारदर्शिता,नीतिगत एवं यूजीसी नियमों क़े अनुसार

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अतिथि विद्वानों क़े स्थाइत्व से कई समस्याओं का होगा समाधान-महासंघ

भोपाल। मध्यप्रदेश  क़े सरकारी महाविद्यालयों में रिक्त पदों क़े विरुद्ध पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से सेवा करने वाले अतिथि विद्वानों क़े दिन क़ब बहुरेंगे आज़ यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।जैसा की विदित हो अतिथि विद्वानों की भर्ती यूजीसी क़े नियमों क़े अनुसार हुईं है साथ ही सरकार द्वारा बनाए गए देश लेबल मेरिट क़े आधार पर एवं डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन क़े बाद हुआ है।अतिथि विद्वानों क़े पास अच्छा खासा 20 से 25 वर्षों का कॉलेजों में पढ़ाने का अनुभव प्राप्त है तो वहीँ नेट सेट पीएचडी जैसे डिग्री धारी भी है।अतिथि विद्वान महाविद्यालय क़े हर काम में निपुण हो चुके है लेकिन आज़ तक उनकी वर्षों पुरानी स्थाइत्व की मांग पूरी नहीं हुईं है जिसके कारण विद्वानों क़े भीतर एक निराशा का भाव उत्पन्न हो गया है।अब देखना होगा आने वाले समय में इन विद्वानों क़े भविष्य सुरक्षा क़ो लेकर मध्य प्रदेश सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।

अतिथि विद्वानों की उपयोगिता,ज़ो उनके दावों क़ो करता है मजबूत

अगर सरकार अतिथि विद्वानों क़े स्थाइत्व की ओर कदम उठाती है तो कई समस्याओ से एक झटके में निजात मिल सकती है।आज़ बहुतायत की संख्या में सहायक प्राध्यापक़ो क़े पद रिक्त पड़े है औऱ उन्ही पदों में अतिथि विद्वान लंबे समय से काम करते आ रहें हैं,विद्वानों क़ो स्थाई करने से योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों की कमी पूरी होगी साथ ही शोध क़ो गति मिलेगी,नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन बेहतर तरीक़े से होगा तो वहीँ पीएचडी गाइड,रिसर्च गाइड की कमी भी पूरी होगी क्योंकि ज़ो पीएससी से नियुक्तियां हो रहीं है वो मात्र नेट सेट उत्तीर्ण होते है उनको पठन पाठन का ना तो कोई अनुभव होता है ना ही रिसर्च का।रिसर्च गाइड वही बन सकते है ज़ो पीएचडी किए हों औऱ अतिथि विद्वान ज्यादातर नेट सेट पीएचडी तीनों डिग्री रखते है।
इनका कहना हे 
उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित अतिथि विद्वान भर्ती प्रक्रिया योग्यता अनुरूप पारदर्शी एवं तकनीकी रूप से पूर्णतया सही व सुरक्षित है।ऑनलाइन प्रणाली से पूर्ण पारदर्शिता से मेरिट अनुरूप अतिथि विद्वानों की नियुक्ति हुईं है।अतः माननीय मंत्री,मुख्यमंत्री,उपमुख्यमंत्री एवं शीर्ष अधिकारीयों से आग्रह है की एक बेहतर पॉलिसी बनाते हुए विद्वानों क़ो 65 वर्ष तक स्थाइत्व प्रदान करें एवं शोषण का प्रतीक फालेन आउट से निजात दिलाएं।
डॉ अविनाश मिश्रा,उपाध्यक्ष अतिथि विद्वान महासंघ

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